प्रेम, करुणा और बंधुत्व से ही सुंदर बनता है जीवन: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जीवन तो प्रभु का प्रसाद है, प्रभु का वरदान है। ईश्वर अंश जीव अविनाशी। चेतन अमल सहज सुखराशी।। सो माया बस भयऊ गोसाईं। बांधेऊ कीर मर्कट की नाईं।।सभी जीव भगवान के अंश हैं अथवा भगवान की संतान हैं। सबके प्रति बंधुत्व भाव ही रखना ठीक है। श्री रामचरितमानस में प्रभु श्री राम स्वयं कहते हैं- सकल सृष्टि यह मोरि उपाया। सब पर मोरि बराबरि दाया।। सब मम प्रिय सब मम उपजाये। सबतेअधिक मनुज मोहि भाये।।परमात्मा ही संसार के स्वामी हैं। किसी व्यक्ति के प्रति भाई-बंधु का भाव रखना ही श्रेष्ठ है।
किसी को कभी भगवान मत समझना, नहीं तो बड़ी विकट स्थिति पैदा होगी। जैसा कि- किसी संत-महापुरुष ने अपनी वाणी में कहा है÷ देखते देखते कोई व्यक्ति भगवान बन बैठे। यहां तो बरसों बीते हमें मानव सा होने में।। जिसको आप भगवान् मानते हैं उसकी कमियां आप सह नहीं सकते, क्योंकि भगवान् में कैसी कमी?दोषों वाले, अपूर्ण भगवान् हो ही नहीं सकते। परमात्मा पूर्ण ही होता है। जब आप कमियां सह नहीं पायेंगे तब आपकी श्रद्धा खंड-खंड हो बिखर जायेगी। आपको इतना गहरा धक्का लगेगा कि हो सकता है कि आप धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र से दूर हो जाओ, नास्तिक बन जाओ। इसलिए किसी भी काम में जल्दबाजी नहीं करना।
मानव हैं हम सब, इससे आगे कुछ नहीं। जिसको आप ऊंचे आसन पर बिठाते हैं उसके विषय में यह बात भी सोचो कि वह भी हम सबकी तरह एक इंसान ही है और उसमें भी कमियां हो सकती हैं। हमारे ऋषि-मुनि बड़े वास्तववादी थे। जब शिष्यों की शिक्षा पूर्ण होती थी और शिष्य अपने स्थान पर वापस जाते थे तब गुरुजी उसे कहते थे – पुत्र! तुम अपना विद्याभ्यास पूर्ण करके जा रहे हो, मुझे वंदन कर रहे हो, ठीक है लेकिन परमात्मा के सिवा कोई पूर्ण नहीं है।
मेरे साथ रहकर तुमने मेरी कुछ कमियां देखी होंगी, वे मेरी कमजोरी हैं। मुझ में भी दोष हैं और मैं अपने दोषों को कमियों को दूर नहीं कर सका। लेकिन तुम उन दुर्गुणों से दोषों से, व्यसनों से बचकर रहना। अपनी कमियों को स्वीकारने वाले ये महात्मा कितने महान और वस्तावादी थे। संत महापुरुष अपनी वाणियों में कहते हैं कि- सबके प्रति बंधुत्व भाव होना ही बहुत बड़ी बात है। ईश्वर के प्रति ही ईश्वर का भाव रखना चाहिए।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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