LPG डिलीवरी के लिए OTP सिस्टम पर कोर्ट का आया फैसला! क्या बदल जाएगी पूरी व्यवस्था या लागू होंगे पुराने नियम?

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Mumbai: भारत में घरेलू LPG सिलेंडर वितरण व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है. सिलेंडर की डिलीवरी के लिए लागू किए गए OTP आधारित डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम को लेकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इसी मुद्दे पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है. साथ ही कहा कि ऑफलाइन बुकिंग व डिलीवरी विकल्पों की निरंतरता पर विचार करें.

डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम से जुड़ा मामला

सरकारी तेल कंपनियों द्वारा लागू किए गए डिजिटल ऑथेंटिकेशन सिस्टम से जुड़ा मामला है. नए नियमों के तहत 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के लिए OTP आधारित सत्यापन अनिवार्य किया गया है. इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता और फर्जी वितरण पर रोक लगाना है लेकिन ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं को इससे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

इस संबंध में हाई कोर्ट में दायर की याचिका 

एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) के अध्यक्ष जयप्रकाश तिवारी ने इस संबंध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया कि कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, जिसके कारण ग्राहकों को समय पर ओटीपी नहीं मिल पाता. तकनीकी गड़बड़ियों और सर्वर समस्याओं के चलते सिलेंडर वितरण में देरी हो रही है. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि शुरुआत में यह डिजिटल सत्यापन प्रणाली केवल 50 प्रतिशत डिलीवरी पर लागू थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 95 प्रतिशत कर दिया गया.

डिलीवरी के लिए डिजिटल ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

इसके बाद अप्रैल 2026 में जारी एक संदेश में 100 प्रतिशत डिलीवरी के लिए डिजिटल ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य बना दिया गया. साथ ही बिना सत्यापन के सिलेंडर देने पर डिस्ट्रीब्यूटर्स के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई. जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े की खंडपीठ ने केंद्र और तेल कंपनियों को निर्देश दिया कि वे तीन सप्ताह के भीतर एसोसिएशन की मांग पर निर्णय लें. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि डिजिटल व्यवस्था जारी रखते हुए कुछ श्रेणियों के उपभोक्ताओं को छूट देने पर विचार किया जा सकता है.

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