NCR में एयर कॉरिडोर से घटेगा सफर का समय, ट्रैफिक से मिलेगी राहत: CII रिपोर्ट

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

देश की प्रमुख उद्योग संस्था भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने एक रोडमैप पेश किया है, जिसमें गुरुग्राम, कनॉट प्लेस और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाले पायलट एयर कॉरिडोर मॉडल का प्रस्ताव रखा गया है. इस योजना का मकसद शहरी इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम करना और यात्रियों के सफर का समय घटाना है. सीआईआई की यह रिपोर्ट “भारत में उन्नत हवाई गतिशीलता के भविष्य का मार्गदर्शन” शीर्षक से जारी की गई है, जिसे नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने लॉन्च किया.

नेट-जीरो 2070 में एयर टैक्सी की भूमिका

रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (eVTOL) विमान यानी एयर टैक्सी का इस्तेमाल भारत के नेट-जीरो 2070 लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर सकता है, क्योंकि ये बिना प्रदूषण के चलते हैं. रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के भीतर एडवांस्ड एयर मोबिलिटी (AAM) के लिए एक अलग और मजबूत नियामक ढांचा तैयार किया जाना चाहिए. इससे eVTOL और एयर टैक्सी जैसी नई सेवाओं को भारतीय हवाई क्षेत्र में सुरक्षित तरीके से शामिल किया जा सकेगा.

DGCA में अलग नियामक इकाई की सिफारिश

रिपोर्ट के मुताबिक, DGCA के तहत बनने वाली यह विशेष इकाई विमान सुरक्षा, संचालन और उड़ान से जुड़े नियम तय करेगी. इसमें कम ऊंचाई पर शहरी इलाकों के ऊपर उड़ान भरने वाले eVTOL विमानों के लिए विशेष मानक भी शामिल होंगे. साथ ही, इन नई हवाई सेवाओं को चरणबद्ध और सुरक्षित तरीके से लागू करने की रणनीति अपनाने पर जोर दिया गया है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शहरी नियोजन एजेंसियों और स्मार्ट सिटी मिशन के साथ मिलकर एयर कॉरिडोर और वर्टीपोर्ट्स (जहां एयर टैक्सी लैंड करेंगी) को शहरों की मास्टर प्लानिंग का हिस्सा बनाया जाना चाहिए.

छतों पर वर्टीपोर्ट को बताया किफायती समाधान

इससे जमीन की उपलब्धता, अन्य परिवहन साधनों से जुड़ाव और बैटरी चार्जिंग की व्यवस्था आसान होगी. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में इमारतों की छतों पर वर्टीपोर्ट एक सस्ता और व्यावहारिक समाधान हो सकता है. हालांकि, फिलहाल DGCA के नियमों के तहत छतों से व्यावसायिक उड़ानों की अनुमति नहीं है. भविष्य में यह व्यवस्था सुरक्षा मूल्यांकन और नए नियम बनने के बाद ही लागू की जा सकेगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीन पर नए वर्टीपोर्ट बनाना महंगा है और इसमें सरकारी मंजूरी में भी समय लगता है, जबकि इमारतों की छतें पहले से उपलब्ध और कम इस्तेमाल की गई जगह हैं.

फंडिंग और निवेश को लेकर अहम सुझाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्टीपोर्ट्स को ऑफिस कॉम्प्लेक्स, अस्पतालों, टेक पार्क और रिहायशी इमारतों में विकसित किया जा सकता है, ताकि आम लोग आसानी से इन सेवाओं का लाभ उठा सकें. इसके साथ ही भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI), बैंकों और सरकारी फंडिंग एजेंसियों से अपील की गई है कि वे एडवांस्ड एयर मोबिलिटी के लिए अलग से वित्तीय व्यवस्था तैयार करें. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, लीजिंग मॉडल और लोन गारंटी जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं, जिससे निवेशकों का जोखिम कम किया जा सके.

ड्रोन डिलीवरी और PPP मॉडल पर जोर

रिपोर्ट में 50 से 100 किलोमीटर की दूरी तक ड्रोन के जरिए सामान और जरूरी मेडिकल सप्लाई पहुंचाने की भी सिफारिश की गई है. इसके अलावा, NCR, बेंगलुरु और मुंबई जैसे बड़े शहरी क्षेत्रों में PPP मॉडल के तहत टेक-ऑफ और लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया गया है. सीआईआई ने कहा कि यह रिपोर्ट एयर कॉरिडोर आधारित अध्ययन पर तैयार की गई है और यह नीति निर्माताओं, निवेशकों और उद्योग जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित होगी, जिससे भारत में सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक हवाई परिवहन की दिशा तय की जा सकेगी.

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