Pakistan: हिंसक झड़पों के बाद पाकिस्तानी सेना ने 180 बलूच लोगों को लिया हिरासत में

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Pakistan Crime: बलूच विद्रोहियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच हुई जबरदस्त झड़पों के कुछ दिनों बाद इस्लामाबाद में अधिकारियों ने बलूचिस्तान में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की है. स्थानीय मीडिया की ओर से रविवार को दी गई जानकारी के मुताबिक, कम से कम 180 लोगों को हिरासत में लिया गया है.

अधिकारियों ने बताया कि बलूचिस्तान के कई शहरों में हुए हमलों के बाद फ्रंटियर कॉर्प्स और पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन चलाया. इस ऑपरेशन के दौरान लगभग 180 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया.

पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन के दौरान हथियारों और गोला-बारूद का एक बड़ा जखीरा भी बरामद किया. इससे पहले पिछले शनिवार को शुरू हुई कार्रवाई के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया है कि ऑपरेशन के दौरान कम से कम 216 बलूच विद्रोही मारे गए. हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि चल रहे सिक्योरिटी कैंपेन के दौरान कई आम लोगों को भी अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा.

इससे पहले बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने 6 फरवरी को कहा था कि संगठन ने हाल के हमलों के दौरान अपने पहले से तय मकसद को कामयाबी से हासिल कर लिया है.

द बलूचिस्तान पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस कैंपेन को बलूचिस्तान के 14 शहरों को टारगेट करने वाला बताया और इसे समूह का अब तक का सबसे बड़ा, सबसे घातक और सबसे सुनियोजित ऑपरेशन बताया. बयान के अनुसार, बलूच लड़ाकों ने कई जगहों पर मिलकर हमले किए और कुछ इलाकों में सिक्योरिटी पोस्ट, सैन्य ठिकानों और शहरी इलाकों के कुछ हिस्सों पर कंट्रोल करने में कामयाब रहे.

बीएलए प्रवक्ता ने दावा किया कि कई शहरों में बीएलए की इकाई ने लगातार छह दिनों तक अपनी पोजीशन बनाए रखी, जिसे उन्होंने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को लगातार पीछे हटने के लिए विवश करना बताया.

इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस बात को कबूल किया था कि बलूच विद्रोहियों के आगे पाक सेना कमजोर पड़ गई थी.

इस मामले पर नेशनल असेंबली (एनए) में ख्वाजा आसिफ ने कहा, बलूचिस्तान भौगोलिक दृष्टिकोण से पाकिस्तान का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है. इसे कंट्रोल करना किसी आबादी वाले शहर या इलाके से कहीं ज्यादा मुश्किल है. इसके लिए भारी फोर्स की जरूरत है. हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और उनके (आतंकियों) के खिलाफ एक्शन में हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की रखवाली और पेट्रोलिंग करने में वे शारीरिक तौर पर कमजोर हैं.

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