India-US Trade Deal: AI हार्डवेयर सेक्टर को भारत-अमेरिका ट्रेड डील से मिलेगा बड़ा फायदा

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के पहले चरण के पूरा होने को भारत के एआई हार्डवेयर सेक्टर के लिए एक अहम बढ़त के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे एडवांस कंप्यूटिंग से जुड़े उपकरणों की लागत में कमी आएगी, जिससे देश में इनकी मैन्युफैक्चरिंग और क्षमता विस्तार को बढ़ावा मिलेगा. खालसा वॉक्स न्यूज पोर्टल में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यह पहली बार है जब दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुए किसी द्विपक्षीय व्यापार समझौते में एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को रणनीतिक संपत्ति के तौर पर मान्यता दी गई है, जिसका भारत के तकनीकी भविष्य पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है.

GPU आयात शुल्क बना अब तक सबसे बड़ी बाधा

अब तक इस सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती जीपीयू सर्वर पर लगने वाला भारी आयात शुल्क रहा है, जो 20 से 28 प्रतिशत तक है. इसकी वजह से भारत में जीपीयू आधारित सेवाएं काफी महंगी हो जाती हैं और सिंगापुर या यूएई जैसे देशों के मुकाबले कम प्रतिस्पर्धी साबित होती हैं. लेख में बताया गया है कि इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, अगर इन टैक्स में कटौती की जाती है तो जीपीयू से लैस डेटा सेंटर स्थापित करने की लागत करीब 14 प्रतिशत तक कम हो सकती है.

निवेश के नए अवसर और भारत की मजबूत स्थिति

इस पहल से देश में बड़े स्तर पर निवेश के नए रास्ते खुलने की संभावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय भारत के लिए अनुकूल है, क्योंकि देश दुनिया के कुल डेटा का करीब पांचवां हिस्सा उत्पन्न करता है, जबकि यहां वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता और एंटरप्राइज जीपीयू की उपलब्धता अभी काफी सीमित है. लेख के अनुसार, दुनिया की प्रमुख क्लाउड और टेक कंपनियां दशक के अंत तक भारत में 80 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर सकती हैं. ट्रेड डील को एक ऐसे अवसर के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भारत ग्लोबल एआई कंप्यूट सर्विसेज के क्षेत्र में एक मजबूत दावेदार के तौर पर उभर सकता है.

नीतियों को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी

हालांकि, विशेषज्ञों ने कुछ अहम सावधानियों की जरूरत पर भी जोर दिया है. उनका कहना है कि एडवांस हार्डवेयर तक आसान पहुंच के साथ-साथ डेटा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू वैल्यू क्रिएशन को सुनिश्चित करने के लिए मजबूत और स्पष्ट नीतियां जरूरी होंगी. लेख में चेतावनी दी गई है कि यदि ऐसी नीतियां समय पर लागू नहीं की गईं, तो आशंका है कि भारत केवल कम मुनाफे वाली कंप्यूटिंग सेवाओं तक सीमित रह जाएगा और असली आर्थिक व रणनीतिक लाभ अन्य देशों को मिल सकता है.

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