GCC Office Space Demand: भारत ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के लिए दुनिया के सबसे पसंदीदा देशों में तेजी से उभर रहा है. देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत नई तकनीकों पर बढ़ते फोकस के चलते ऑफिस स्पेस की मांग लगातार बढ़ रही है. एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो वर्षों में भारत में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की कुल लीजिंग में लगभग आधी हिस्सेदारी केवल ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर की हो सकती है. इससे भारत की पहचान वैश्विक इनोवेशन हब के रूप में और मजबूत होने की उम्मीद है.
दो साल में 50% तक पहुंच सकती है हिस्सेदारी
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी कंपनी कोलियर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 और 2027 के दौरान भारत में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की कुल लीजिंग मांग में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की हिस्सेदारी 45 से 50 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में देश में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की सालाना लीजिंग 3.5 करोड़ से 4 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच सकती है.
2021 से अब तक 11.8 करोड़ वर्ग फुट स्पेस लीज पर लिया
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 से अब तक देश के सात प्रमुख शहरों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर ने करीब 11.8 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है. यह इस अवधि के दौरान कुल ऑफिस स्पेस लीजिंग का लगभग 37 प्रतिशत हिस्सा है. सिर्फ 2026 की पहली छमाही में ही GCC ने 1.66 करोड़ वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीज पर लिया, जो इस दौरान हुई कुल ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस लीजिंग का 46 प्रतिशत रहा.
अब सिर्फ बैक-ऑफिस नहीं रहे GCC
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर अब केवल पारंपरिक बैक-ऑफिस संचालन तक सीमित नहीं हैं. वे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों के रणनीतिक केंद्र बन चुके हैं. यही वजह है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने कैपेबिलिटी सेंटर का लगातार विस्तार कर रही हैं.
भारत की मजबूत स्थिति पर क्या बोले कोलियर्स इंडिया के एमडी?
कोलियर्स इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर (ऑफिस सर्विसेज) अर्पित मेहरोत्रा ने कहा कि प्रतिभा, लागत दक्षता, तकनीकी क्षमता, नीतिगत समर्थन और अनुकूल कारोबारी माहौल के दम पर भारत ने खुद को GCC आधारित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित किया है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार जारी रखेंगी और AI आधारित इनोवेशन ऑफिस स्पेस की मांग को आगे बढ़ाने वाला प्रमुख कारक बना रहेगा.
टेक सेक्टर सबसे आगे, लेकिन तेजी से बढ़ रहा विविधीकरण
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 से अब तक GCC लीजिंग में टेक्नोलॉजी सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक 39 प्रतिशत रही है. हालांकि, अब अन्य सेक्टरों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है. बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (BFSI) सेक्टर की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत रही, जबकि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का योगदान 16 प्रतिशत रहा. रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच BFSI सेक्टर की लीजिंग लगभग तीन गुना बढ़ी, जबकि इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लीजिंग 2.5 गुना से अधिक बढ़ गई.
बेंगलुरु और हैदराबाद सबसे आगे
शहरों के लिहाज से बेंगलुरु और हैदराबाद GCC बाजार के सबसे बड़े केंद्र बने हुए हैं. वर्ष 2021 से अब तक हुई कुल GCC लीजिंग में इन दोनों शहरों की संयुक्त हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से अधिक रही. हालांकि, अब चेन्नई, पुणे, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में भी बहुराष्ट्रीय कंपनियां नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने में तेजी से रुचि दिखा रही हैं.
टियर-2 और टियर-3 शहरों तक बढ़ेगा विस्तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में AI-नेटिव GCC, नैनो और मिड-साइज GCC तथा हब-प्लस-वन रणनीति के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों तक परिचालन का विस्तार इस क्षेत्र की वृद्धि के अगले चरण को गति देगा. इससे भारत में GCC इकोसिस्टम और ऑफिस स्पेस की मांग दोनों के और मजबूत होने की संभावना है.
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