IMEC कॉरिडोर और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से खुलेगा वैश्विक व्यापार का नया रास्ता: विशेषज्ञ

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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India Export News: भारत को वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से काम कर रही है. उद्योग जगत, नीति विशेषज्ञों और व्यापार संगठनों का कहना है कि आधुनिक बंदरगाह, बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क तथा भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) जैसी परियोजनाएं देश के निर्यात को नई ऊंचाई तक ले जाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. इसके साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार, अनुपालन का बोझ कम करने और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने वाले कदम भी भारत की आर्थिक प्रगति को गति दे सकते हैं.

हाईवे, रोड और वाटरवे से मजबूत हुआ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क

राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हाईवे, रोडवे, वाटरवे और दूसरे बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है. उनके मुताबिक, बंदरगाह अब व्यापार और लॉजिस्टिक्स की रीढ़ बन चुके हैं. इससे माल की आवाजाही में लगने वाला समय कम हुआ है और बेहतर वेयरहाउसिंग सुविधाओं की वजह से सामान व्यापारियों तक तेजी से पहुंच रहा है.

सिंघी ने कहा कि आने वाले समय में लॉजिस्टिक्स का समय और कम होगा, क्योंकि सरकार लगातार सुधार लागू कर रही है. उनके मुताबिक, व्यापारियों के लिए 40,000 से अधिक अनुपालनों को खत्म किया गया है. वहीं, जन विश्वास विधेयक के जरिए करीब 1,000 ऐसे प्रावधानों को हटाया गया है, जिनकी वजह से कारोबारियों को अनावश्यक उत्पीड़न या जेल जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता था.

भारत की बढ़ रही निर्यात क्षमता

सुनील जे. सिंघी ने भरोसा जताया कि भारत अपनी निर्यात क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है और आने वाले समय में दुनिया के प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल हो सकता है. उन्होंने कहा कि भारतीय व्यापारियों से लेकर निर्यातकों तक सामान पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूत और प्रभावी हो रही है.

IMEC कॉरिडोर से बढ़ेगा भारत का रणनीतिक महत्व

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नेशनल प्रोग्राम डायरेक्टर और एनएचईवी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अभिजीत सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि IMEC कॉरिडोर भारत को ट्रांसशिपमेंट हब बनाने की प्रधानमंत्री मोदी की सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है. उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर है और भारत के पूर्वी तथा पश्चिमी तट इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. उनके मुताबिक, जब यह कॉरिडोर दुबई के रास्ते यूरोप तक पहुंचेगा और कांडला, जेएनपीए तथा मुंद्रा जैसे प्रमुख भारतीय बंदरगाह जेबेल अली और अबू धाबी पोर्ट से जुड़ेंगे, तो भारत की ट्रांसशिपमेंट क्षमता और रणनीतिक महत्व काफी बढ़ सकता है.

हालांकि, अभिजीत सिंह ने यह भी कहा कि भारत और मध्य पूर्व क्षेत्र में मौजूद कुछ भू-राजनीतिक चुनौतियों का समाधान कूटनीतिक स्तर पर किया जाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि IMEC का जो हिस्सा पहले से विकसित हो चुका है, उसे जल्द संचालित कर आगे और मजबूत किया जाना चाहिए.

ट्रांसशिपमेंट पोर्ट पर भारत का बढ़ता फोकस

अभिजीत सिंह के मुताबिक, वैश्विक व्यापार और माल ढुलाई की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत के लिए आधुनिक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विकसित करना बेहद जरूरी है. अब तक इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा श्रीलंका के पास रहा है, लेकिन भारत तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.

छह महीने में निर्यात में करीब 20% की बढ़ोतरी

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (ICRIER) की प्रोफेसर डॉ. सौमेन रॉय ने आईएएनएस से कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के निर्यात प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है. उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत के निर्यात में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. भारत अब चीन जैसे बाजारों में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात कर रहा है, जबकि सिंगापुर और दूसरे देशों में भी भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

डॉ. रॉय ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चुनौतियों, बढ़ते टैरिफ और वैश्विक व्यापारिक बाधाओं के बावजूद भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है. उनके मुताबिक, यह देश की आर्थिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है.

डीप-टेक स्टार्टअप्स होंगे अगली ग्रोथ की कुंजी

नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भारत की भविष्य की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा आधार डीप-टेक स्टार्टअप्स बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए कर्ज की उपलब्धता पर चर्चा होती रही है, लेकिन भविष्य की असली कुंजी डीप-टेक स्टार्टअप्स में है. उन्होंने बताया कि वह खुद कई ऐसे स्टार्टअप्स से मिले हैं, जो नई तकनीकों के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं.

उनके मुताबिक, यही कंपनियां भविष्य में भारत को वैश्विक नवाचार शक्ति बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं. विरमानी ने कहा कि भारत के विकास की अगली कहानी केवल पारंपरिक उद्योगों से नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और उन्नत स्टार्टअप्स से लिखी जाएगी.

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