Jal Jeevan Mission 2.0: हर घर जल योजना में बड़ा बदलाव, 3 लाख करोड़ के नए अवसर; अब मेंटेनेंस पर फोकस

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन (JJM) अब नए चरण में प्रवेश कर रही है. Jal Jeevan Mission 2.0 के तहत अब सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर नहीं, बल्कि पानी की सप्लाई को लंबे समय तक सुचारू रूप से चलाने और बनाए रखने पर खास जोर दिया जाएगा. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव से ऑपरेशन और मेंटेनेंस (O&M) सेक्टर में करीब 3 लाख करोड़ रुपए के बड़े अवसर पैदा होने की संभावना है.

बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए के पार

आईसीआरए की रिपोर्ट में बताया गया है कि जल जीवन मिशन का कुल बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया है. इसके साथ ही इस योजना को अब सर्विस-डिलीवरी मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.

भुगतान में सुधार का लक्ष्य

रिपोर्ट के अनुसार, परियोजनाओं की समयसीमा बढ़ने और बजट में वृद्धि के कारण कंपनियों को भुगतान में सुधार हो सकता है. फिलहाल कई राज्यों में भुगतान में 6 महीने से अधिक की देरी हो रही है, लेकिन सरकार ने सितंबर 2026 तक इसे घटाकर 60 दिन से कम करने का लक्ष्य रखा है.

हर घर जल का लक्ष्य अब 2028 तक

सरकार ने 19.4 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक 100 प्रतिशत नल कनेक्शन पहुंचाने की समयसीमा 2024 से बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दी है. इसका मतलब है कि अब योजना को ज्यादा व्यवस्थित और टिकाऊ तरीके से लागू किया जाएगा.

पाइप और टेक्नोलॉजी कंपनियों को फायदा

रिपोर्ट में कहा गया है कि पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली बड़ी कंपनियों को इसका खास फायदा मिलेगा. अब गुणवत्ता, निरंतर सप्लाई और ऊर्जा दक्षता पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा. साथ ही, जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीक और सर्विस नेटवर्क है, वे इस नए मॉडल में आगे निकल सकती हैं.

इंफ्रास्ट्रक्चर से सर्विस मॉडल की ओर बदलाव

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2025-26 के बाद बजट और वास्तविक खर्च में अंतर देखने को मिला है, जिससे साफ है कि योजना के क्रियान्वयन में चुनौतियां रही हैं. अब सरकार इस योजना को केवल निर्माण तक सीमित रखने के बजाय एक स्थायी सेवा मॉडल में बदल रही है.

अब गुणवत्ता और निगरानी पर जोर

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत पानी की नियमित सप्लाई, गुणवत्ता की निगरानी और डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे सुजलम भारत) के जरिए मॉनिटरिंग पर जोर दिया जाएगा. इसके साथ ही ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सप्लाई एक स्थायी सार्वजनिक सेवा बन सके.

अब तक की उपलब्धियां

जल जीवन मिशन की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी. तब से अब तक नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या करीब 5 गुना बढ़कर 323.6 लाख से 1,582.3 लाख हो चुकी है. फरवरी 2026 तक ग्रामीण क्षेत्रों में कवरेज 81 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है.

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