LPG Consumption: सितंबर में LPG की खपत 9.15% घटी, पेट्रोल-डीजल की बिक्री बढ़ी, जानें क्या है वजह

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

LPG Consumption: देश में ईंधन की मांग को लेकर सितंबर के आंकड़ों ने एक अलग तस्वीर पेश की है. एक तरफ पेट्रोल और डीजल की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर एलपीजी की खपत में बड़ी गिरावट आई है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में एलपीजी की खपत 9.15% घट गई. दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिली. ईंधन लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है. घरों में खाना बनाने के लिए एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल होता है, जबकि आने-जाने और सामान ढोने के लिए पेट्रोल और डीजल की जरूरत पड़ती है. ऐसे में सितंबर के आंकड़ों में तीनों ईंधनों की मांग में आया यह अंतर कई सवाल खड़े करता है.

सितंबर में LPG की खपत कितनी घटी?

PPAC के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में एलपीजी की खपत पिछले साल की तुलना में 9.15 प्रतिशत घटकर 2.64 मिलियन टन रह गई. यानी एक साल पहले की तुलना में इस बार सितंबर में देश में एलपीजी की कुल खपत कम रही. एलपीजी की खपत में आई इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजहों में गैस की उपलब्धता और सप्लाई से जुड़ी परिस्थितियों को माना जा रहा है.

मिडिल ईस्ट के तनाव का LPG सप्लाई पर असर

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर गैस की सप्लाई पर भी पड़ा. भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने से एलपीजी की उपलब्धता और सप्लाई पर दबाव बढ़ा. इस दौरान कई बार एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली.

इसके अलावा रिफिल बुकिंग की समय सीमा भी बढ़ाई गई. इन परिस्थितियों का असर एलपीजी की खपत के आंकड़ों पर दिखाई दिया. इसी वजह से सरकार एलपीजी पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा के दूसरे विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठा रही है.

पेट्रोल और डीजल की बिक्री में बढ़ोतरी

जहां एलपीजी की खपत में गिरावट आई, वहीं पेट्रोल और डीजल की बिक्री में तेजी देखने को मिली.

डीजल की बिक्री:
सितंबर में डीजल की बिक्री पिछले साल की तुलना में 4.86 प्रतिशत बढ़कर 7.12 मिलियन टन हो गई.

पेट्रोल की बिक्री:
इसी अवधि में पेट्रोल की बिक्री 7.21 प्रतिशत बढ़कर 3.64 मिलियन टन पहुंच गई.

इस तरह सितंबर के दौरान पेट्रोल और डीजल की मांग में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि एलपीजी की खपत में गिरावट रही.

क्या लोगों ने घरों में LPG का इस्तेमाल कम कर दिया?

एलपीजी की खपत में 9.15 प्रतिशत की गिरावट को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि देश में लोगों ने घरों में एलपीजी का इस्तेमाल करना बंद या बहुत कम कर दिया है. आज भी बड़ी संख्या में परिवार खाना बनाने के लिए घरेलू 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं. सितंबर में खपत में आई कमी को एलपीजी की उपलब्धता और सप्लाई से जुड़ी परिस्थितियों के संदर्भ में भी देखना जरूरी है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर भारत में इसकी उपलब्धता पर भी पड़ा. यही वजह है कि सितंबर के आंकड़ों में एलपीजी की खपत पिछले साल की तुलना में कम दिखाई दी.

तीनों ईंधनों की मांग में अलग-अलग रुझान

सितंबर के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि देश में अलग-अलग ईंधनों की मांग एक जैसी नहीं रही. LPG की खपत 9.15% घटकर 2.64 मिलियन टन, जबकि डीजल की बिक्री 4.86% बढ़कर 7.12 मिलियन टन और पेट्रोल की बिक्री 7.21% बढ़कर 3.64 मिलियन टन हो गई. एलपीजी की खपत में गिरावट के पीछे जहां सप्लाई और उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियां महत्वपूर्ण रही हैं, वहीं पेट्रोल-डीजल की बिक्री में बढ़ोतरी ने सितंबर के ईंधन बाजार की अलग तस्वीर सामने रखी है.

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