एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता के दावों के बावजूद शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलिंडर की किल्लत से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है. हालात ऐसे हो गए हैं कि कई होटल, ढाबों और घरों में गैस चूल्हों की जगह फिर से भट्ठियां और पारंपरिक चूल्हे जलने लगे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलिंडर की बुकिंग की समयसीमा बढ़ने के कारण कई महिलाओं ने रसोई का काम दोबारा चूल्हों पर करना शुरू कर दिया है, ताकि गैस सिलिंडर की खपत कम की जा सके.
बुकिंग और ई-केवाईसी से बढ़ी परेशानी
सिलिंडर बुकिंग और ई-केवाईसी की अनिवार्यता के बाद गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भीड़ बढ़ गई है. उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसियों के सर्वर की धीमी गति और कंपनियों के हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल न लगने के कारण समस्या और बढ़ रही है. इस स्थिति से सबसे ज्यादा परेशानी होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट व्यवसाय से जुड़े लोगों को हो रही है.
कई जगह कोयला और लकड़ी से बन रहा खाना
गैस सिलिंडर की कमी के कारण कई होटल और ढाबा संचालकों को अब कोयला और लकड़ी का सहारा लेना पड़ रहा है. खिरनीबाग के होटल संचालक संदीप का कहना है कि सिलिंडर खत्म होने के बाद उन्हें मजबूरन दो भट्ठियां मंगवानी पड़ीं. वहीं सदर बाजार के मिठाई और फास्ट फूड विक्रेता पप्पू ने बताया कि अब उनके यहां ज्यादातर खाना भट्ठी पर ही तैयार किया जा रहा है.
गांवों में फिर जले पारंपरिक चूल्हे
ग्रामीण क्षेत्रों में चूल्हे पर खाना बनाना नई बात नहीं है, लेकिन लंबे समय बाद कई घरों में इनकी आंच फिर तेज हो गई है. गैस की बचत के लिए लकड़ी और उपलों का इस्तेमाल बढ़ गया है. हालांकि लोगों का कहना है कि चूल्हे पर खाना बनाने में धुआं ज्यादा होता है और समय भी अधिक लगता है, लेकिन मजबूरी में यही विकल्प अपनाना पड़ रहा है.
ढाबों और होटलों पर भी असर
कमर्शियल गैस सिलिंडर की कमी का असर ढाबों और होटलों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. गंगसरा में ढाबा चलाने वाले मनोज गुप्ता ने बताया कि सिलिंडर न मिलने के कारण उन्हें कोयला खरीदकर खाना बनाना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो उन्हें अपने ढाबे का मेन्यू भी बदलना पड़ सकता है.
कुछ जगहों पर होटल बंद करने की नौबत
सिलिंडर की कमी के कारण कुछ व्यवसायियों को होटल और दुकानें बंद करने तक की नौबत आ गई है. मिठाई विक्रेता रामसिंह राठौर ने बताया कि गैस सिलिंडर न मिलने के कारण उन्हें होटल अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा. वहीं महाराजा होटल के संचालक रामजी गुप्ता ने शाहजहांपुर से कोयला और भट्ठी मंगवाकर काम शुरू किया.
समाधान की उम्मीद
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो लोगों को लंबे समय तक पारंपरिक चूल्हों और भट्ठियों का सहारा लेना पड़ सकता है. इससे न केवल समय और मेहनत ज्यादा लगेगी बल्कि धुएं के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं.
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