New Income Tax Act 2025: भारत में नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू होने जा रहा है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा. हालांकि, करदाताओं के लिए एक अहम जानकारी सामने आई है कि इस साल उन्हें अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत ही फाइल करना होगा.
विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, सरकार इस नए कानून को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रही है. इसी कारण वित्त वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) के दौरान अर्जित आय को असेसमेंट ईयर 2026-27 में मौजूदा कानून के तहत ही दाखिल किया जाएगा. वहीं, नया इनकम टैक्स एक्ट वित्त वर्ष 2026-27 में अर्जित आय पर लागू होगा, जिसका असेसमेंट ईयर 2027-28 होगा.
64 साल पुराने कानून की जगह लेगा नया एक्ट
नया कानून 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा. सरकार का दावा है कि इससे टैक्स सिस्टम को ज्यादा सरल, पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाया जाएगा. हालांकि, टैक्स दरों या स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नियमों में कई अहम सुधार किए गए हैं, जिनका असर नौकरीपेशा लोगों, निवेशकों और व्यवसायियों पर पड़ेगा.
अब होगा सिर्फ ‘टैक्स ईयर’
नए नियमों के तहत फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जगह अब सिर्फ एक “टैक्स ईयर” का कॉन्सेप्ट लागू किया जाएगा. इससे टैक्स भरने की प्रक्रिया आसान होगी और लोगों को अलग-अलग टर्म समझने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
ITR फाइलिंग की समयसीमा तय
नए कानून के तहत ITR फाइल करने की समयसीमा भी स्पष्ट कर दी गई है. सामान्य करदाताओं के लिए 31 जुलाई, बिजनेस और प्रोफेशन से जुड़े लोगों के लिए 31 अगस्त, जबकि ऑडिट वाले मामलों में 31 अक्टूबर तक रिटर्न दाखिल किया जा सकेगा. विशेष परिस्थितियों में यह समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ाई जा सकती है. इसके अलावा, टैक्स ईयर खत्म होने के 12 महीने तक संशोधित (Revised) रिटर्न दाखिल करने की सुविधा भी दी गई है.
HRA नियमों में बड़ा बदलाव
हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं. अब कर्मचारियों को छूट पाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के संबंध की जानकारी देना अनिवार्य होगा. अच्छी बात यह है कि अब मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई के साथ-साथ हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को सैलरी के 50% तक HRA छूट मिलेगी. बाकी शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत ही रहेगी. इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देता है, तो उसे मकान मालिक का PAN नंबर देना अनिवार्य होगा.
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