Oil Price Surge: मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चा तेल उछला, ब्रेंट 112 डॉलर के पार, बाजार में हलचल

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Oil Price Surge: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तेजी से दिखने लगा है. पिछले कुछ हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल मच गई है. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में संघर्ष शुरू होने के बाद से 60 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई है. यह करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर सोमवार को लगभग 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.

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MCX पर भी कच्चा तेल महंगा

घरेलू बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मई वायदा के लिए कच्चे तेल का दाम 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 9,310 रुपये प्रति बैरल हो गया. पिछले 30 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 56 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है. वहीं, अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब 98.75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जिसमें हाल के सत्र में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई.

होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ गया है. यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. स्थिति ऐसी बन गई है कि कई तेल उत्पादन संयंत्रों में उत्पादन घटाने और सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है.

ट्रंप की चेतावनी, ईरान का पलटवार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का अल्टीमेटम दिया था, जिसकी समयसीमा अब खत्म हो रही है. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है. इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की धमकी दी है. हालांकि, ईरान ने यह भी कहा है कि जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है और जहाजों की आवाजाही जारी है, लेकिन सुरक्षा कारणों से सख्ती बढ़ा दी गई है.

गोल्डमैन सैक्स ने बढ़ाया अनुमान

वैश्विक वित्तीय संस्था गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य अनुमान बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जो पहले 77 डॉलर था. साथ ही मार्च-अप्रैल के लिए औसत कीमत करीब 110 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति सामान्य स्तर के सिर्फ 5 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है और इसमें सुधार आने में करीब एक महीने का समय लग सकता है.

भंडार बढ़े, लेकिन संकट जारी

हालांकि एशिया में तेल की सप्लाई पर दबाव बना हुआ है, लेकिन अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों में कच्चे तेल का भंडार अभी भी बढ़ रहा है. इससे यह संकेत मिलता है कि संघर्ष शुरू होने से पहले वैश्विक सप्लाई मांग से ज्यादा थी.

उत्पादन में भारी गिरावट का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में कच्चे तेल के उत्पादन में होने वाला नुकसान 1.1 करोड़ बैरल प्रति दिन से बढ़कर 1.7 करोड़ बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है. यह स्थिति वैश्विक बाजार पर और दबाव डाल सकती है और आने वाले समय में कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

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