मजबूत रबी फसल के बीच RBI ने FY26-27 में महंगाई दर 4.6% रहने का लगाया अनुमान

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस साल रबी फसल का उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है, जिससे देश में खाद्य आपूर्ति मजबूत होगी. खाद्य कीमतें महंगाई का बड़ा हिस्सा होती हैं, ऐसे में यदि उत्पादन अच्छा रहता है तो महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. यानी एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर दबाव है, वहीं घरेलू कृषि उत्पादन महंगाई को संतुलित करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

गवर्नर का बयान जस का तस

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, “वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर प्रीमियम पेट्रोल, एलपीजी और औद्योगिक उपयोग के डीजल जैसे ईंधनों पर देखने को मिला है.” उन्होंने यह भी कहा कि अच्छी रबी फसल के चलते निकट भविष्य में खाद्य आपूर्ति बेहतर रहने की उम्मीद है, जिससे महंगाई को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है.

तिमाही आधार पर पूरा ब्रेकअप

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का तिमाही अनुमान भी साझा किया है. इसके अनुसार पहली तिमाही में महंगाई 4.0% रहने का अनुमान है, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 4.4% हो सकती है. तीसरी तिमाही में महंगाई 5.2% तक पहुंचने का अनुमान है, जो साल का सबसे ऊंचा स्तर हो सकता है. इसके बाद चौथी तिमाही में यह घटकर 4.7% रहने की संभावना जताई गई है. इससे साफ है कि साल के बीच में महंगाई में उछाल आ सकता है.

पश्चिम एशिया और एल नीनो का खतरा

RBI ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष महंगाई के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है. इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ऊर्जा कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयातक देश पर पड़ता है. इसके अलावा, संभावित एल नीनो जैसी मौसमीय परिस्थितियां भी कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे खाद्य कीमतों में उछाल आ सकता है.

कोर महंगाई फिलहाल काबू में

गवर्नर ने बताया कि कोर महंगाई, जिसमें खाद्य और ईंधन शामिल नहीं होते, वित्त वर्ष 2026-27 में 4.4% रहने का अनुमान है. कीमती धातुओं को छोड़कर यह और भी कम है, जो इस बात का संकेत है कि अर्थव्यवस्था के भीतर से आने वाला महंगाई दबाव फिलहाल सीमित है. RBI के अनुसार, पिछली मौद्रिक नीति के बाद वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता काफी बढ़ गई है. हालांकि फिलहाल कुल महंगाई दर लक्ष्य के भीतर है, लेकिन ऊर्जा कीमतों और वैश्विक घटनाओं के कारण इसमें तेजी आने की आशंका बनी हुई है.

सप्लाई चेन और सेकेंड राउंड इफेक्ट्स का असर

केंद्रीय बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि सप्लाई चेन में बाधाएं और सेकेंड राउंड इफेक्ट्स भविष्य में महंगाई को और जटिल बना सकते हैं. यानी यदि लागत बढ़ती है तो उसका असर धीरे-धीरे अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिल सकता है, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.

अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत

RBI गवर्नर ने कहा कि फरवरी 2026 तक के हाई-फ्रीक्वेंसी संकेतकों से यह पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत गति बनी हुई है. निजी खपत और निवेश मांग विकास को सहारा दे रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं. हालांकि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष केवल महंगाई ही नहीं, बल्कि आर्थिक वृद्धि पर भी असर डाल सकता है. ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी, अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई और बीमा लागत में इजाफा, साथ ही सप्लाई चेन में बाधाएं कई उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती हैं.

सरकार के प्रयास और राहत की उम्मीद

सरकार ने निर्यात को समर्थन देने और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. इन उपायों से उम्मीद है कि वैश्विक संकट के असर को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा.

RBI की रणनीति: ‘वेट एंड वॉच’

मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने माना है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष की तीव्रता और अवधि, साथ ही ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान से महंगाई और विकास दोनों पर जोखिम बढ़ गया है. RBI गवर्नर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल अर्थव्यवस्था एक सप्लाई शॉक का सामना कर रही है और बदलती परिस्थितियों को देखते हुए ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाना ही सही होगा.

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