भारत का रेडी-टू-ड्रिंक पेय बाजार तेजी से बढ़ा, 2030 तक दोगुना होने की उम्मीद: रिपोर्ट

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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भारत का रेडी-टू-ड्रिंक (आरटीडी) नॉन-अल्कोहलिक पेय बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है. गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह बाजार 2025 के करीब 20 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 40 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है इस ग्रोथ का बड़ा कारण क्विक कॉमर्स का तेजी से बढ़ना है, खासकर आरटीडी कैटेगरी में, जहां 100 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि देखी गई है.

खरीदारी के तरीके में बदलाव

रिपोर्ट में बताया गया है कि लोगों के खरीदारी के तरीके में बड़ा बदलाव आया है. पहले लोग स्टॉक करके खरीदारी करते थे, लेकिन अब जरूरत के हिसाब से तुरंत खरीदारी (इंस्टेंट कंजम्प्शन) बढ़ रही है. भारत में प्रति व्यक्ति आरटीडी पेय की खपत अभी 15-20 लीटर है, जो वैश्विक स्तर से काफी कम है. इसका मतलब है कि इस सेक्टर में आगे काफी तेजी से बढ़ने की संभावना है. तुलना करें तो अमेरिका में यह खपत 100-120 लीटर, चीन में 70-80 लीटर और ब्रिटेन में 60-70 लीटर है, जो भारत से कई गुना ज्यादा है.

हेल्दी पेय की मांग में उछाल

रिपोर्ट के अनुसार, प्रोटीन ड्रिंक्स, हेल्दी हाइड्रेशन ड्रिंक्स और पैकेज्ड नारियल पानी की मांग तेजी से बढ़ रही है. पैकेज्ड नारियल पानी का हिस्सा लगभग 900 मिलियन डॉलर के बाजार में 15-20 प्रतिशत है, जिसमें से 20 प्रतिशत से ज्यादा बिक्री क्विक कॉमर्स के जरिए हो रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि क्विक कॉमर्स पैकेज्ड फूड और बेवरेज सेक्टर में तेजी से बड़ा रोल निभा रहा है, खासकर उन कैटेगरी में जहां तुरंत जरूरत, सुविधा और बार-बार खरीदारी होती है.

भविष्य में और तेजी की उम्मीद

अनुमान है कि क्विक कॉमर्स बाजार 4 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक करीब 25 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है और कुल मांग में एक बड़ा हिस्सा हासिल करेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्मियों जैसे मौसमी कारण मांग को बढ़ाते हैं, लेकिन असली बदलाव लोगों के व्यवहार और आसान पहुंच के कारण है, जो लंबे समय तक रहेगा.

मृगांक गुटगुटिया ने कहा कि बेवरेज इंडस्ट्री इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उठाने वाली है. उन्होंने कहा, ये प्रोडक्ट्स ज्यादा बार खरीदे जाते हैं और अक्सर अचानक खरीदारी होती है. भारत में लंबी गर्मी के मौसम के कारण इनकी मांग और बढ़ जाती है.  कम प्रति व्यक्ति खपत और हेल्दी विकल्पों की बढ़ती पसंद के कारण इस सेक्टर में लंबे समय तक मजबूत ग्रोथ देखने को मिलेगी. उन्होंने ब्रांडों से कहा कि वे नए प्रोडक्ट, सही कीमत और बेहतर डिस्ट्रीब्यूशन रणनीति पर ध्यान दें, ताकि बदलती मांग और अलग-अलग बाजारों का फायदा उठाया जा सके.

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