SBI GST Report: देश के राज्यों की वित्तीय स्थिति को लेकर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की नई रिसर्च रिपोर्ट में बड़ा दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में GST कलेक्शन और बेसिक एक्साइज ड्यूटी (BED) में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ने से उन्हें पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब ₹1.43 लाख करोड़ का अतिरिक्त शुद्ध लाभ मिलने का अनुमान है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टैक्स व्यवस्था में हुए बदलावों से राज्यों की आय में मजबूती आएगी और आने वाले समय में GST कलेक्शन की रफ्तार भी फिर तेज हो सकती है.
GST कलेक्शन में फिर आएगी तेजी
SBI की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में GST कलेक्शन की वृद्धि दर कुछ धीमी जरूर हुई है, लेकिन यह गिरावट पहले से अनुमानित थी. इसकी मुख्य वजह GST रेट रैशनलाइजेशन रही है. रिपोर्ट का अनुमान है कि आने वाले समय में GST कलेक्शन दोबारा गति पकड़ेगा और इसकी सालाना वृद्धि 8 से 9 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है.
राज्यों की हिस्सेदारी बढ़कर ₹19.1 लाख करोड़ होने का अनुमान
रिपोर्ट के मुताबिक, संशोधित टैक्स व्यवस्था के तहत कंपेनसेशन सेस को समाप्त कर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (AED) लागू की गई है. इस बदलाव के बाद GST और बेसिक एक्साइज ड्यूटी से राज्यों की कुल हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025-26 के लगभग ₹17.7 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में करीब ₹19.1 लाख करोड़ होने का अनुमान है. SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा कि कुल राजस्व हिस्सेदारी का आकार बढ़ा है और इसका सीधा फायदा राज्यों को मिलेगा.
AED लागू होने से क्या बदलेगा?
रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में बेसिक एक्साइज ड्यूटी (BED) में 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है और पूरी अतिरिक्त राशि को AED माना जाए, तो इसका अनुमानित मूल्य ₹35,874 करोड़ होगा. हालांकि, नई व्यवस्था में राज्यों को AED का केवल 41 प्रतिशत, यानी करीब ₹14,708 करोड़ ही मिलेगा. पहली नजर में इससे लगभग ₹21,000 करोड़ का काल्पनिक नुकसान दिखाई देता है, लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि 28 राज्यों में यह राशि बांटने पर इसका प्रभाव काफी सीमित रह जाता है.
पान-तंबाकू पर ज्यादा टैक्स से राज्यों को होगा फायदा
रिपोर्ट में बताया गया है कि पान और तंबाकू जैसे डीमेरिट गुड्स पर GST दर 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किए जाने के बाद राज्यों को पहले की तुलना में अधिक राजस्व मिलेगा. उदाहरण के तौर पर, ₹100 के टैक्स योग्य इंट्रा-स्टेट लेनदेन पर पहले राज्यों को ₹19.74 मिलते थे, जबकि नई व्यवस्था में यह बढ़कर ₹28.20 हो जाएगा. यानी प्रति ₹100 के टैक्स योग्य लेनदेन पर राज्यों को ₹8.46 का अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जबकि केंद्र सरकार का हिस्सा केवल ₹3.54 बढ़ेगा.
कंपेनसेशन सेस को लेकर क्या कहा?
SBI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह धारणा सही नहीं है कि कंपेनसेशन सेस कभी केंद्र सरकार का राजस्व नहीं था. रिपोर्ट के मुताबिक, यह सेस केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता था और पहले केंद्र के कर राजस्व के रूप में दर्ज होता था. इसके बाद इस राशि को GST कंपेनसेशन फंड में स्थानांतरित किया जाता था, जहां से राज्यों को अनुदान (Grant) के रूप में भुगतान किया जाता था. रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि नई टैक्स व्यवस्था के बावजूद राज्यों की कुल आय में बढ़ोतरी होगी और उन्हें वित्त वर्ष 2026-27 में पिछले साल की तुलना में करीब ₹1.43 लाख करोड़ का अतिरिक्त शुद्ध लाभ मिलने की संभावना है.
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