भारतीय शेयर बाजार में साेमवार काे गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी भी 2 प्रतिशत लुढ़के

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Sensex opening bell: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में कोई ठोस प्रगति न होने के बाद वैश्विक बाजारों में घबराहट का माहौल बन गया है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ देखने को मिला. सोमवार को घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक करीब 2 प्रतिशत तक गिर गए. सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह 2.16 प्रतिशत यानी 1,675 अंक टूटकर 75,874.85 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया. वहीं, निफ्टी भी लगभग 500 अंकों यानी 2.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,555 पर कारोबार करता नजर आया.

लाल निशान में सभी सेक्टोरल इंडेक्स

बाजार में बैंकिंग, फाइनेंशियल, रियल्टी, ऑटो और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे. इस गिरावट में आयशर मोटर्स, मारुति सुजुकी, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस और एचडीएफसी बैंक जैसे बड़े शेयर सबसे ज्यादा नुकसान में रहे.

अगर बाजार की कैटेगरी के हिसाब से देखें, तो स्मॉल-कैप शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 250 दोनों करीब 2-2 प्रतिशत नीचे रहे. इसके अलावा मिडकैप और लार्जकैप शेयरों में भी गिरावट का असर साफ दिखा. बाजार में डर और अनिश्चितता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वोलैटिलिटी इंडेक्स, यानी इंडिया वीआईएक्स, में 13 प्रतिशत से ज्यादा उछाल आया.

महंगाई और अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ी चिंताएं 

विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के कारण निवेशकों का रुख अचानक जोखिम से बचने वाला हो गया है. खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. पहले कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर से गिरकर 94-100 डॉलर के बीच आ गई थीं, लेकिन अब यह फिर से 105 डॉलर के ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. भारत के लिए यह स्थिति और भी गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि देश अपनी 85 प्रतिशत से ज्यादा तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है. ऐसे में तेल की बढ़ती कीमतें चालू खाता घाटा बढ़ा सकती हैं, रुपए पर दबाव डाल सकती हैं और महंगाई को बढ़ा सकती हैं.

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