UPI Record: भारत में डिजिटल पेमेंट का सफर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है. जुलाई 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने एक नया इतिहास रच दिया. इस दौरान देशभर में 23.66 अरब (23.66 Billion) यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू 29.88 लाख करोड़ रुपये रही. यह यूपीआई के शुरू होने के बाद किसी भी एक महीने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. ये आंकड़े नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की ओर से जारी किए गए हैं.
जून के मुकाबले जुलाई में और तेज हुई रफ्तार
यूपीआई का ग्राफ हर महीने नई ऊंचाई छू रहा है. जून 2026 में जहां 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, वहीं जुलाई में यह संख्या बढ़कर 23.66 अरब पहुंच गई. यानी एक महीने में करीब 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. सिर्फ ट्रांजैक्शन की संख्या ही नहीं, बल्कि उनकी कुल वैल्यू में भी इजाफा हुआ. जून में जहां यूपीआई के जरिए हुए लेनदेन की कुल राशि कम थी, वहीं जुलाई में यह बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो जून के मुकाबले 3.3 प्रतिशत ज्यादा है.
एक साल में रिकॉर्ड स्तर की बढ़ोतरी
अगर सालाना आधार पर तुलना करें तो यूपीआई की रफ्तार और भी ज्यादा प्रभावशाली नजर आती है. जुलाई 2025 की तुलना में जुलाई 2026 में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 22 प्रतिशत और ट्रांजैक्शन वैल्यू में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि देश में डिजिटल पेमेंट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है.
हर शहर और गांव तक पहुंचा UPI
यूपीआई अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है. टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. आज लोग किराना स्टोर, सब्जी मंडी, मेडिकल स्टोर, मोबाइल रिचार्ज, बिजली-पानी के बिल और छोटे-बड़े सभी तरह के भुगतान के लिए यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं. QR कोड आधारित पेमेंट सिस्टम और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच ने इसे और अधिक लोकप्रिय बना दिया है.
IMPS और FASTag के आंकड़े भी आए सामने
NPCI के मुताबिक, जुलाई 2026 में IMPS के जरिए 364 मिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जो जून के मुकाबले करीब 3% ज्यादा हैं. वहीं FASTag ट्रांजैक्शन में मामूली गिरावट दर्ज की गई. दूसरी ओर AePS (Aadhaar Enabled Payment System) के जरिए 100 मिलियन ट्रांजैक्शन हुए, जो पिछले महीने की तुलना में अधिक हैं.
कैशलेस इकोनॉमी की ओर तेजी से बढ़ रहा भारत
जुलाई के रिकॉर्ड आंकड़े साफ बताते हैं कि भारत तेजी से डिजिटल और कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ रहा है. छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक, लगभग हर वर्ग अब डिजिटल पेमेंट को प्राथमिकता दे रहा है. यूपीआई की लगातार बढ़ती लोकप्रियता देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल भुगतान प्रणाली की मजबूत होती पहुंच का भी संकेत है.
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