WPI Inflation: सरकार ने लॉन्च की नई थोक महंगाई सीरीज, मई में महंगाई दर 9.68% पहुंची, 957 वस्तुएं हुईं शामिल

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

WPI Inflation: देश में महंगाई को मापने की प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की नई सीरीज लॉन्च कर दी. इस नई सीरीज में वर्ष 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है. इसके साथ ही मंत्रालय ने मई 2026 के लिए थोक महंगाई के आंकड़े भी जारी किए, जिनके अनुसार देश में WPI आधारित महंगाई दर 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई.

नई व्यवस्था के तहत सरकार ने केवल WPI सीरीज को ही अपडेट नहीं किया है, बल्कि उत्पादक मूल्य मापन प्रणाली (Producer Price Measurement System) को भी आधुनिक बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. इसके तहत नई इंडेक्स सीरीज और विस्तारित बास्केट को शामिल किया गया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और उत्पादन गतिविधियों की अधिक सटीक तस्वीर सामने आ सकेगी.

2011-12 की जगह अब 2022-23 होगा नया आधार वर्ष

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी नई WPI सीरीज ने 2011-12 आधार वर्ष वाली पुरानी सीरीज की जगह ले ली है. सरकार का कहना है कि अर्थव्यवस्था में समय के साथ हुए बदलावों को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित करने के लिए आधार वर्ष को अपडेट करना आवश्यक था. नई सीरीज देश में उत्पादक मूल्य मापन प्रणाली में किए जा रहे व्यापक सुधारों का हिस्सा है, जिससे कीमतों और उत्पादन लागत से जुड़े आंकड़ों को अधिक वास्तविक और प्रासंगिक बनाया जा सके.

कई नई इंडेक्स सीरीज भी की गईं जारी

संशोधित WPI सीरीज के साथ सरकार ने कई अन्य महत्वपूर्ण मूल्य सूचकांक भी जारी किए हैं. इनमें आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (OPPI), ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (IPPI) और सात सेवाओं के लिए सर्विस प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) की नई सीरीज शामिल है. इन नई इंडेक्स सीरीज का उद्देश्य उत्पादन लागत, सेवाओं की कीमतों और उद्योगों की मूल्य संरचना का अधिक व्यापक आकलन करना है.

IMF की सिफारिशों के अनुरूप उठाया गया कदम

मंत्रालय के अनुसार, प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स की दिशा में यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सिफारिशों और वैश्विक मानकों के अनुरूप किया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपयोगकर्ताओं और विभिन्न संस्थाओं को नई प्रणाली अपनाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा. इसी उद्देश्य से WPI सीरीज को अगले पांच वर्षों तक जारी रखा जाएगा.

मई में 9.68% रही थोक महंगाई

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में अखिल भारतीय WPI आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर 9.68 प्रतिशत दर्ज की गई. इसी अवधि में सभी वस्तुओं का समग्र सूचकांक बढ़कर 109.9 पर पहुंच गया, जो थोक स्तर पर कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी का संकेत देता है. मई महीने के दौरान प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर 4.99 प्रतिशत तक पहुंच गई. यह वृद्धि कृषि उत्पादों और अन्य प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में आए बदलाव को दर्शाती है, जिसका असर समग्र थोक महंगाई पर भी देखने को मिला.

ईंधन और बिजली श्रेणी में सबसे ज्यादा दबाव

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली (Fuel & Power) श्रेणी में महंगाई दर लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गई. ऊर्जा क्षेत्र में आई यह तेज बढ़ोतरी थोक महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारणों में शामिल रही. ऊर्जा लागत बढ़ने का प्रभाव अन्य क्षेत्रों की उत्पादन लागत पर भी पड़ता है. मई के दौरान विनिर्मित उत्पादों (Manufactured Products) की महंगाई दर बढ़कर 7.48 प्रतिशत दर्ज की गई. यह संकेत देता है कि उद्योगों में उत्पादन लागत का दबाव बना हुआ है और इसका असर तैयार उत्पादों की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है.

किन वस्तुओं ने बढ़ाई महंगाई?

मंत्रालय ने बताया कि खनिज तेल, कच्चा पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद तथा बेसिक मेटल्स थोक महंगाई को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे. इन क्षेत्रों में कीमतों में आई तेजी का सीधा प्रभाव WPI आधारित महंगाई दर पर पड़ा. मई महीने में WPI फूड इंडेक्स के तहत खाद्य महंगाई दर 4.49 प्रतिशत दर्ज की गई. यह आंकड़ा खाद्य वस्तुओं की थोक कीमतों में सालाना आधार पर हुई बढ़ोतरी को दर्शाता है.

697 से बढ़कर 957 हुई वस्तुओं की संख्या

संशोधित WPI सीरीज के तहत बास्केट में शामिल वस्तुओं की कुल संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है. इस बदलाव का उद्देश्य अर्थव्यवस्था में मौजूद अधिक उत्पादों और क्षेत्रों को मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल करना है, ताकि महंगाई की गणना अधिक व्यापक और सटीक हो सके. नई सीरीज में बिजली श्रेणी के अंतर्गत सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को भी शामिल किया गया है. इसके अलावा पहली बार परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को भी WPI बास्केट का हिस्सा बनाया गया है.

ऊर्जा बास्केट में किया गया बड़ा बदलाव

सरकार ने ऊर्जा बास्केट की संरचना में भी महत्वपूर्ण संशोधन किया है. नई व्यवस्था के तहत कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी से हटाकर ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी में शामिल कर दिया गया है. संशोधित पद्धति में वस्तुओं के वेटेज तय करने के लिए ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट (GVO) का उपयोग किया गया है. साथ ही इंडेक्स तैयार करने और कीमतों की अनुपलब्धता जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए नई तकनीकों को भी अपनाया गया है.

OPPI और IPPI के आंकड़े भी जारी

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मई में सभी वस्तुओं के लिए नया आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (OPPI) 109.6 दर्ज किया गया. वहीं विनिर्माण क्षेत्र के लिए ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (IPPI) 104.9 दर्ज किया गया.

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