SMS Scam: भारत में डिजिटल पेमेंट और मोबाइल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं. बायोकैच (BioCatch) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की दूसरी छमाही से 2026 की पहली छमाही के दौरान देश में एसएमएस (SMS) आधारित धोखाधड़ी के मामलों में 146 प्रतिशत और मोबाइल फ्रॉड में 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. रिपोर्ट बताती है कि साइबर अपराधी अब पहले की तुलना में अधिक संगठित, तेज और तकनीकी रूप से सक्षम हो गए हैं, जिससे लोगों के लिए डिजिटल धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ता जा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर ठग अब वेब ब्राउजर की बजाय मोबाइल प्लेटफॉर्म को अधिक निशाना बना रहे हैं. तेजी से बढ़ते यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म का फायदा उठाकर अपराधी नए-नए तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं.
SMS स्कैम और मोबाइल फ्रॉड में बड़ी बढ़ोतरी
बायोकैच की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की दूसरी छमाही से 2026 की पहली छमाही के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में SMS स्कैम में 146 प्रतिशत और मोबाइल फ्रॉड में 67 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फ्रॉड में बढ़ोतरी iOS डिवाइस पर 86 प्रतिशत और Android डिवाइस पर 35 प्रतिशत रही. इससे साफ है कि साइबर अपराधी अब सभी प्रमुख मोबाइल प्लेटफॉर्म को निशाना बना रहे हैं.
कम समय में हो रही ज्यादा रकम की ठगी
रिपोर्ट में कहा गया है कि धोखाधड़ी अब पहले की तुलना में अधिक तेज और महंगी होती जा रही है. जोखिमपूर्ण भुगतान (Risky Payments) की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि फ्रॉड सत्रों की औसत अवधि 32 प्रतिशत घट गई है. वहीं, प्रत्येक फ्रॉड सत्र में औसत ट्रांसफर राशि 1.7 गुना बढ़ गई है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि धोखाधड़ी वाले भुगतान प्रयासों के कुल मूल्य में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि औसत कॉल अवधि 31 प्रतिशत और फ्रॉड सत्रों की औसत अवधि 32 प्रतिशत कम हो गई है.
साइबर अपराधियों का फोकस अब मोबाइल प्लेटफॉर्म
रिपोर्ट के मुताबिक, वेब ब्राउजर आधारित फ्रॉड में 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. इससे संकेत मिलता है कि साइबर अपराधी अब तेजी से मोबाइल आधारित धोखाधड़ी की ओर बढ़ रहे हैं. मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट के बढ़ते उपयोग ने साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल डिवाइस को सबसे आसान लक्ष्य बना दिया है.
8.5 लाख से ज्यादा म्यूल अकाउंट की पहचान
जांच एजेंसियों ने 2025 के दौरान भारत के विभिन्न बैंकों की 700 से अधिक शाखाओं में 8.5 लाख से ज्यादा म्यूल अकाउंट की पहचान की. रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों में शामिल कुल राशि 22,496 करोड़ रुपए तक पहुंच गई. इसी अवधि में 26.48 लाख म्यूल अकाउंट के मामले सामने आए, जबकि संदिग्ध रजिस्ट्री की मदद से 9,055 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन को रोका गया.
टॉम पीकॉक ने क्या कहा?
बायोकैच के ग्लोबल फ्रॉड इंटेलिजेंस निदेशक टॉम पीकॉक ने कहा कि SMS स्कैम इसलिए बेहद प्रभावी होते हैं क्योंकि वे भरोसेमंद संचार माध्यम का फायदा उठाते हैं. इससे फर्जी संदेश भी असली लगते हैं और लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे कार्रवाई कर बैठते हैं. उन्होंने कहा कि उच्च मूल्य वाले फ्रॉड प्रयासों और कम समय में पूरी होने वाली कॉल एवं सत्र यह दिखाते हैं कि साइबर अपराधी पहले से कहीं अधिक कुशल हो गए हैं. टॉम पीकॉक के अनुसार, धोखाधड़ी के तरीके लगातार अधिक आधुनिक होते जा रहे हैं. अपराधी अब सुनियोजित सोशल इंजीनियरिंग और स्वचालित तकनीकों का इस्तेमाल कर पीड़ितों को गुमराह करते हैं और चेतावनी संकेत सामने आने से पहले ही उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं.
डिजिटल भुगतान के साथ बढ़ा साइबर जोखिम
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), मोबाइल बैंकिंग, ई-कॉमर्स और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते उपयोग ने एक मजबूत डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम तैयार किया है. हालांकि, यही डिजिटल इकोसिस्टम अब साइबर ठगों के लिए भी सबसे आकर्षक लक्ष्य बनता जा रहा है.
बैंकों और एजेंसियों के बीच बढ़ रहा सहयोग
बायोकैच के ग्लोबल एडवाइजरी निदेशक सुभाशीष बोस ने कहा कि सकारात्मक बात यह है कि बैंकों, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि व्यवहार आधारित इंटेलिजेंस बैंकों को केवल एक बार की पहचान सत्यापन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उपयोगकर्ता की मंशा का लगातार आकलन करने में मदद करती है. इससे बैंक धोखाधड़ी की जल्द पहचान कर तेजी से कार्रवाई कर सकते हैं.
यह भी पढ़े: मणिपुर: सुरक्षा बलों ने चार तस्करों को दबोचा, भारी मात्रा में अफीम और ब्राउन शुगर बरामद

