Interpol Operation First Light 2026: ऑनलाइन ठगी और सोशल इंजीनियरिंग स्कैम के खिलाफ इंटरपोल ने भारत समेत 97 देशों के साथ मिलकर करीब साढ़े तीन महीने ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 चलाया. इस अभियान में 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 15,606 संदिग्धों की पहचान हुई और 31,014 बैंक खाते ब्लॉक किए गए.
इतना ही नहीं, इस कार्रवाई के दौरान 293 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध रकम अपराधियों तक पहुंचने से पहले रोक दी गई. इस दौरान फर्जी पुलिस अधिकारी, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम और क्रिप्टो नेटवर्क इस ऑपरेशन के प्रमुख निशाने रहे.
क्या है मामला?
यदि आपके मोबाइल पर कभी बैंक अधिकारी, पुलिस अफसर, किसी सरकारी एजेंसी या निवेश कंपनी के नाम पर फोन आया हो और आपसे पैसे ट्रांसफर करने या बैंक डिटेल साझा करने के लिए कहा गया हो, तो समझ लीजिए कि यह उसी तरह के अपराध हैं जिनके खिलाफ इंटरपोल ने दुनिया का सबसे बड़ा अभियान चलाया है.
बता दें कि ऑनलाइन ठगी अब सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का रूप ले चुकी है. इसी खतरे से निपटने के लिए इंटरपोल ने भारत समेत 97 देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों के साथ मिलकर *ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026* चलाया, जिसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे.
फर्जी पुलिस, निवेश और रोमांस स्कैम नेटवर्क का भंडाफोड़
इंटरपोल के मुताबिक, अभियान के दौरान 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 15,606 संदिग्धों की पहचान हुई, 31,014 बैंक खातों को ब्लॉक किया गया, 99 इंटरपोल नोटिस और डिफ्यूजन जारी किए गए और 293 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध रकम को अपराधियों के हाथों में पहुंचने से रोक दिया गया.
कब से कब तक चलाया अभियान
दरअसल, यह अभियान 15 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक चला. हालांकि इसकी तैयारियां काफी पहले से चल रही थी. सबसे पहले कई देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों ने साइबर अपराधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की. इसके बाद अलग-अलग देशों में सक्रिय गैंग, उनके बैंक खाते, क्रिप्टो वॉलेट, फोन नंबर, फर्जी कंपनियां और डिजिटल नेटवर्क की पहचान की गई. फिर एक तय रणनीति के तहत सभी देशों ने लगभग एक ही समय पर कार्रवाई शुरू की.
इस दौरान हजारों जगहों पर छापेमारी की गई, संदिग्ध परिसरों को खंगाला गया, बैंक खातों को फ्रीज किया गया, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट ब्लॉक किए गए और कई बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया.
साइबर अपराधियों पर सबसे बड़ी कार्रवाई
आपको बता दें कि इंटरपोल का यह पूरा अभियान मुख्य रूप से सोशल इंजीनियरिंग स्कैम के खिलाफ था. यह साइबर अपराध का ऐसा तरीका है जिसमें अपराधी किसी तकनीकी कमजोरी का फायदा नहीं उठाते, बल्कि इंसान के भरोसे, डर, लालच या भावनाओं का इस्तेमाल करके उसे ठगते हैं. कई मामलों में अपराधी वीडियो कॉल पर फर्जी वर्दी पहनकर बात करते हैं ताकि सामने वाले को यकीन हो जाए कि वह किसी सरकारी अधिकारी से बात कर रहा है.