UPPSC Exam: उत्तर प्रदेश के लखनऊ में UPPSC की स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़े का मामला सामने आया. एक रेलवे टेक्नीशियन अपने दोस्त की जगह परीक्षा देने पहुंचा था, लेकिन बायोमेट्रिक जांच के दौरान आइरिस मैच नहीं होने से उसकी पहचान संदिग्ध हो गई. दोबारा सत्यापन और पूछताछ के बाद पूरा मामला सामने आया. आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया.
आइरिस स्कैन ने खोली पोल
लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज के ब्लॉक-बी में UPPSC परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया था. पहली पाली की परीक्षा सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित हुई. इसी दौरान परीक्षा संचालन से जुड़ी संस्था इनोवेटिव व्यू के कंट्रोल रूम ने केंद्र को सूचना दी कि शशांक कुमार मिश्रा के नाम से परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी का आइरिस सत्यापन सफल नहीं हो रहा है.
दस्तावेज दिखाने से किया इनकार UPPSC Exam
सूचना मिलने के बाद केंद्र अधिकारियों ने दोबारा बायोमेट्रिक प्रक्रिया और आधार से पहचान की जांच कराने के निर्देश दिए. परीक्षा समाप्त होने के बाद संदिग्ध युवक को केंद्र पर ही रोक लिया गया और उससे आधार कार्ड समेत अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे गए. हालांकि, उसने दस्तावेज दिखाने से इनकार कर दिया. स्थिति संदिग्ध लगने पर केंद्र की ओर से पुलिस को सूचना दी गई. इसके बाद पुलिस टीम के साथ स्टैटिक मजिस्ट्रेट नृपेन्द्र सिंह, सेक्टर मजिस्ट्रेट, केंद्र व्यवस्थापक और आयोग के अधिकारी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने युवक से पूछताछ की तो उसने अपनी असली पहचान उजागर कर दी.
पूछताछ में सामने आई असली पहचान
पूछताछ में युवक ने बताया कि उसका नाम जयशंकर त्रिपाठी है और उसकी उम्र 37 वर्ष है. वह गोरखपुर के विकासनगर विस्तार का रहने वाला है। उसने स्वीकार किया कि वह शशांक कुमार मिश्रा की जगह परीक्षा देने केंद्र पहुंचा था. मामला सामने आने के बाद जयशंकर को हिरासत में लेकर हजरतगंज थाने ले जाया गया. स्टैटिक मजिस्ट्रेट नृपेन्द्र सिंह की शिकायत के आधार पर उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.
10 लाख में हुई थी डील
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कानपुर देहात में रेलवे टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत है. उसका दोस्त शशांक कुमार मिश्रा UPPSC की परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल करना चाहता था. इसी के लिए दोनों के बीच कथित तौर पर 10 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था. आरोप है कि फर्जी पहचान तैयार करने के लिए शशांक के वोटर आईडी कार्ड पर जयशंकर की तस्वीर लगाई गई थी। इसी कूटरचित पहचान पत्र के जरिए वह परीक्षा केंद्र में पहुंचा और शशांक के नाम पर परीक्षा देने बैठ गया. हालांकि, परीक्षा के दौरान आइरिस सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद उसकी योजना नाकाम हो गई. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है.