केमिकल से पके केले से रहें सावधान! ऐसे करें पहचान और जानिए आज का सवाल

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Chemical Banana Identification: देशभर में केले की मांग लगातार बनी रहती है. नाश्ते से लेकर लंच, स्नैक्स और डेजर्ट तक, यह फल हर घर की जरूरत का हिस्सा बन चुका है. पोषण के लिहाज से भी केला बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसमें विटामिन बी6, विटामिन-सी, मैग्नीशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार, केले में मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है. वहीं, इसमें पाया जाने वाला ‘ट्रिप्टोफैन’ नामक तत्व मूड को बेहतर करने और गहरी नींद लाने में सहायक होता है. हालांकि, बाजार में मिलने वाला हर चमकदार पीला केला सुरक्षित नहीं होता. बढ़ती मांग और जल्दी मुनाफा कमाने की होड़ में कई जगहों पर फलों को कृत्रिम तरीके से पकाया जा रहा है. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि उपभोक्ता असली और केमिकल से पके केले के बीच अंतर समझें.

ऐसे करें केमिकल से पके केले की पहचान

केमिकल से पके केले की पहचान करने के लिए सबसे पहले उसके रंग और बनावट पर ध्यान देना जरूरी है. आमतौर पर ऐसे केले बीच से पूरी तरह पीले दिखाई देते हैं, जबकि उनके ऊपरी और निचले सिरे हरे रह जाते हैं. यह असमान रंग इस बात का संकेत होता है कि फल को प्राकृतिक रूप से नहीं, बल्कि केमिकल की मदद से पकाया गया है.

इसके अलावा, कई बार ऐसे केले जरूरत से ज्यादा चमकदार दिखाई देते हैं और उनका रंग एक जैसा नहीं होता. यह भी इस बात का संकेत है कि फल को कृत्रिम प्रक्रिया के जरिए जल्दी पकाया गया है.

प्राकृतिक रूप से पके केले की पहचान

प्राकृतिक तरीके से पके केले की पहचान अपेक्षाकृत आसान होती है. ऐसे केले का रंग एकसमान होता है और उसकी डंडी यानी ऊपरी हिस्सा अक्सर गहरा या काला पड़ जाता है. इसके साथ ही, छिलके पर हल्के काले धब्बे भी दिखाई देते हैं, जो यह दर्शाते हैं कि फल अपने प्राकृतिक समय पर पका है. ऐसे केले खाने के लिए सुरक्षित माने जाते हैं और इनमें पोषक तत्व भी बेहतर तरीके से मौजूद रहते हैं.

सेहत पर क्या असर पड़ता है?

फलों को जल्दी पकाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला कैल्शियम कार्बाइड स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है. इसके सेवन से पेट में जलन, दर्द, सूजन और डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में इसके कारण सिरदर्द, चक्कर और घबराहट की शिकायत भी सामने आती है. इसके अलावा, इस प्रक्रिया के दौरान निकलने वाली गैसें गले में खराश और सांस लेने में परेशानी का कारण बन सकती हैं.

क्या कहते हैं नियम

FSSAI ने कैल्शियम कार्बाइड के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया हुआ है. इसमें आर्सेनिक और फास्फोरस जैसे जहरीले तत्व पाए जाते हैं, जो मानव शरीर के लिए खतरनाक हैं. इसके विकल्प के तौर पर, फलों को पकाने के लिए एथिलीन गैस के सीमित और सुरक्षित उपयोग की अनुमति दी गई है. 23 अगस्त 2016 को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इसका उपयोग अधिकतम 100 ppm तक ही किया जा सकता है.

Quiz (आज का सवाल)

👉 बाजार में केले को जल्दी पकाने के लिए आमतौर पर किस खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है?

A. सोडियम क्लोराइड
B. कैल्शियम कार्बाइड
C. सल्फर डाइऑक्साइड
D. एथिलीन गैस

⏳ 10 सेकंड में जवाब सोचिए…

👇
👇
👇

✅ सही जवाब

👉 B. कैल्शियम कार्बाइड

यह भी पढ़े: डोनाल्ड ट्रंप की बढ़ी टेंशन! अमेरिका के खिलाफ युद्ध में ईरान का साथ देगा चीन

Latest News

पाकिस्तान: तेल की कीमतों के बाद अब जनता को बिजली पर टैरिफ का झटका

Pakistan Electricity Tariff: पाकिस्तान ने जनता को डबल झटका दिया है. तेल की कीमतों के बाद अब बिजली पर...

More Articles Like This

Exit mobile version