सिर्फ सफाई नहीं, आयुर्वेद में स्नान के बताए गए हैं कई फायदे, बस जान लें ये तीन स्टेप्स

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bathing Benefits: भागदौड़ भरी जिंदगी में हर काम तेजी से किया जा रहा है, क्योंकि खुद के लिए कुछ भी करने का समय ही नहीं है. जीवनशैली इतनी जटिल हो गई है कि खाना भी आराम से खाने का समय नहीं मिलता. खाने के साथ-साथ ठीक से नहाने तक का समय नहीं मिलता है. आमतौर पर धारणा है कि नहाना सिर्फ एक नित्य कर्म है, जिसका उद्देश्य केवल शरीर की बाहरी स्वच्छता तक सीमित है, लेकिन ऐसा नहीं है. आयुर्वेद में स्नान को ‘संस्कार’ और ‘चिकित्सा’ माना गया है, जो तन के साथ-साथ मन की भी शुद्धि करता है.

शरीर की गंदगी को दूर करने के लिए लाभकारी

स्नान संस्कार शरीर की गंदगी को दूर रखने के साथ मन को ऊर्जा से भरने के लिए भी लाभकारी है. इसके अलावा स्नान करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है, सुस्ती दूर होती है, मन प्रसन्न रहता है, नकारात्मक शक्ति कम होती है, रक्त का संचार अच्छे से होता है, और थकान भी कम महसूस होती है.

मेटाबॉलिज्म में होता है सुधार Bathing Benefits

रोजाना स्नान करने से मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है और शरीर की ‘अग्नि’ संतुलित होती है. इसका कनेक्शन शरीर के तापमान से भी रहता है. शरीर का अपने नियमित तापमान में रहना बहुत जरूरी है और शरीर के तापमान को स्नान नियंत्रित करता है. आयुर्वेद कहता है कि जब शरीर पर पानी पड़ता है तो पूरे शरीर में रक्त का संचार तेजी से होता है और पाचन अग्नि भी तेजी से काम करती है.

तनाव और ‘कोर्टिसोल’ का स्तर होता है कम

स्नान करने से तनाव और ‘कोर्टिसोल’ का स्तर भी कम होता है. शोध में भी पाया गया है कि स्नान करने से शरीर में ‘एंडोर्फिन’ का स्तर बढ़ता है. ये हार्मोन मन को प्रसन्न करने का काम करते हैं और तनाव को कम करते हैं. इसके अलावा, स्नान अच्छी नींद लाने में भी सहायक है. अगर नींद आने में परेशानी होती है, तो गुनगुने पानी से स्नान करने से आराम मिलता है और नर्वस सिस्टम शांत होता है. अगर स्नान करना संभव नहीं है, तो गुनगुने पानी में कुछ समय पैर को डुबोकर रख सकते हैं.

क्या है स्नान करने का सही तरीका

अब सवाल है कि स्नान करने का सही तरीका क्या है. आयुर्वेद में स्नान करने के तीन नियम बताए गए हैं. पहला अभ्यंग करना. नहाने से 15 मिनट पहले किसी भी तेल से पूरे शरीर की मालिश करें, जैसे नवजात शिशु की होती है. दूसरा, अभ्यंग के बाद उबटन का प्रयोग करें. उबटन, केमिकल वाले साबुन से कई गुना प्रभावी और असरदार होता है. ये त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाकर नई कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है. तीसरा, मंत्रोच्चार करना. स्नान के समय मंत्रोच्चार करना मन और मस्तिष्क दोनों के लिए लाभकारी होता है. ये सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करता है.

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