Diarrhea in Children: बच्चों में डायरिया से बचाव के लिए अपनाएं ये 5 आदतें, हाथ धोने से लेकर साफ पानी तक रखें खास ध्यान

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Health Tips: डायरिया यानी दस्त को अक्सर लोग सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन खासकर छोटे बच्चों में यह तेजी से गंभीर रूप ले सकता है. इसकी सबसे बड़ी चिंता शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी यानी डिहाइड्रेशन है. अच्छी बात यह है कि साफ पानी, स्वच्छता और कुछ आसान सावधानियों को रोज की आदत बनाकर डायरिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सुरक्षित पानी, बेहतर स्वच्छता, साबुन से हाथ धोना और पहले छह महीने तक केवल स्तनपान डायरिया से बचाव के प्रमुख उपायों में शामिल हैं.

भारत में भी स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन बच्चों में डायरिया की रोकथाम और उपचार के लिए दस्त रोकथाम अभियान (STOP Diarrhoea Campaign) चला रहा है. अभियान में हाथों की सफाई, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता के साथ डायरिया होने पर ORS और जिंक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है.

खाना खाने से पहले और शौच के बाद जरूर धोएं हाथ

डायरिया से बचाव में हाथों की सफाई सबसे आसान लेकिन बेहद जरूरी कदम है. खाना खाने या बच्चे को खाना खिलाने से पहले और शौचालय का इस्तेमाल करने के बाद साबुन और साफ पानी से हाथ धोने की आदत डालें. गंदे हाथों के जरिए संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्मजीव खाने, पानी और दूसरी सतहों तक पहुंच सकते हैं. इसलिए सिर्फ बच्चों को ही नहीं, बल्कि घर के सभी सदस्यों को हाथों की स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए. WHO भी डायरिया की रोकथाम के लिए साबुन से हाथ धोने को प्रमुख उपायों में शामिल करता है.

बच्चों को हमेशा साफ और सुरक्षित पानी दें

पीने का पानी साफ होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका सही तरीके से भंडारण करना भी है. घर में इस्तेमाल होने वाले पानी को साफ और ढके हुए बर्तन में रखें. बच्चों को पीने के लिए सुरक्षित पानी ही दें. खुले बर्तन में रखा पानी गंदगी और संक्रमण के संपर्क में आ सकता है. WHO के मुताबिक दूषित पानी और खराब स्वच्छता डायरिया फैलने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं.

पहले 6 महीने सिर्फ मां का दूध

छोटे बच्चों के लिए स्तनपान भी डायरिया से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. WHO पहले छह महीने तक केवल मां का दूध देने की सलाह देता है. इसके बाद बच्चे की उम्र के अनुसार पौष्टिक पूरक आहार शुरू किया जाता है और स्तनपान जारी रखा जा सकता है. मां का दूध बच्चे को पोषण देने के साथ संक्रमणों से लड़ने में भी मदद करता है. इसलिए नवजात और छोटे बच्चों की देखभाल में स्तनपान को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

घर और आसपास की सफाई भी जरूरी

डायरिया से बचने के लिए सिर्फ हाथ और पानी की सफाई पर्याप्त नहीं है. घर और आसपास का वातावरण भी साफ रखना जरूरी है. शौच के लिए हमेशा शौचालय का इस्तेमाल करें और बच्चों को भी इसकी आदत डालें. घर के आसपास गंदा पानी जमा न होने दें और नालियों की नियमित सफाई करें. भोजन को साफ तरीके से तैयार और सुरक्षित तरीके से रखने पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि दूषित भोजन और खराब स्वच्छता से संक्रमण फैल सकता है.

डायरिया हो जाए तो सबसे पहले डिहाइड्रेशन से बचाएं

अगर बच्चे या किसी बड़े को डायरिया हो जाए तो सबसे जरूरी है कि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न होने दें. ऐसे में ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन का इस्तेमाल किया जाता है. WHO के अनुसार डायरिया के दौरान ORS शरीर से निकलने वाले पानी और लवणों की भरपाई करने में मदद करता है और बच्चों के इलाज में यह महत्वपूर्ण उपाय है. बच्चों में डायरिया के इलाज में जिंक सप्लीमेंटेशन की भी सिफारिश की जाती है.

WHO के मुताबिक जिंक डायरिया की अवधि और गंभीरता को कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि, बच्चे की उम्र और स्थिति के अनुसार इसकी खुराक स्वास्थ्यकर्मी की सलाह के मुताबिक ही दी जानी चाहिए.

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

अगर डायरिया लगातार बना रहे, मल में खून आए या बच्चे में डिहाइड्रेशन के संकेत दिखाई दें, तो डॉक्टर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से तुरंत संपर्क करना चाहिए. WHO भी ऐसे मामलों में स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेने की सिफारिश करता है. डायरिया के दौरान बच्चे को खाना और स्तनपान पूरी तरह बंद नहीं करना चाहिए. WHO के अनुसार, पोषक आहार और स्तनपान जारी रखना भी देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

ध्यान रखें: छोटे बच्चों में डायरिया तेजी से डिहाइड्रेशन का कारण बन सकता है. इसलिए घर पर शुरुआती देखभाल के साथ बच्चे की स्थिति पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय मदद लेना बेहद जरूरी है.

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