Health Tips: जन्म से सुनने की समस्या (कंजेनिटल डेफनेस) से जूझ रहे बच्चों और युवाओं के लिए अब एक उम्मीद की किरण जग गई है. एक नया रिसर्च ऐसे बच्चों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर लेकर आया है. प्रतिष्ठित जर्नल Nature में प्रकाशित स्वीडन के Karolinska Institute की नई स्टडी ने जीन थेरेपी के जरिए बहरेपन के इलाज की नई उम्मीद जगाई है.
सामान्य स्तर तक बढ सकती है सुनने की क्षमता
अब तक जहां हियरिंग एड और कॉक्लियर इम्प्लांट ही सहारा थे, वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में एक खास इलाज के जरिए सुनने की क्षमता को लगभग सामान्य स्तर तक वापस लाया जा सकता है. अक्सर देखा जाता है कि कुछ बच्चों में जन्म से ही कोई न कोई कमी होती है. खासकर जब समस्या सुनने या बोलने से जुड़ी हो, तो बच्चों को बचपन से ही कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, चाहे वह पढ़ाई हो, संवाद हो या सामान्य जीवन.
बच्चों को सुनने में कोई दिक्कत नहीं
इस रिसर्च में पाया गया कि एक खास जेनेटिक कारण से होने वाले बहरेपन को अब काफी हद तक ठीक किया जा सकता है. जिससे बच्चों को सुनने में कोई दिक्कत नहीं आएगी. यह बहरापन आमतौर पर OTOF जीन में बदलाव (म्यूटेशन) के कारण होता है. यह जीन ओटोफरलिन नामक एक महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाने का काम करता है, जो कान से दिमाग तक ध्वनि के सिग्नल पहुंचाने में मदद करता है.
समस्या को ठीक करेगी जीन थेरेपी
जब यह प्रोटीन सही तरीके से काम नहीं करता, तो व्यक्ति के कान आवाज को महसूस तो कर लेते हैं, लेकिन वह सिग्नल दिमाग तक ठीक से नहीं पहुंच पाते, जिससे सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है. रिसर्चर्स ने इस समस्या को ठीक करने के लिए जीन थेरेपी का इस्तेमाल किया. एक हेल्दी जीन को शरीर में डाला गया. इसके लिए सुरक्षित वायरस (AAV) का उपयोग किया गया.
इलाज के परिणाम बेहद उत्साहजनक
इंजेक्शन के जरिए जीन को सीधे कान के अंदर पहुंचाया गया. यह प्रक्रिया कान के अंदर राउंड विंडो नाम की जगह पर की गई. इस इलाज के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे. कई मरीजों ने 1 महीने के अंदर सुधार महसूस किया. 6 महीने में सभी मरीजों में सुनने की क्षमता बेहतर हो गई. मरीज अब पहले से धीमी आवाजें भी सुनने लगे.
अपनी मां से बातचीत करने लगी एक बच्ची
रिसर्च में सबसे ज्यादा फायदा 5 से 8 साल के बच्चों में देखा गया. एक बच्ची ने तो कुछ महीनों में लगभग सामान्य सुनने की क्षमता हासिल कर ली और अपनी मां से बातचीत करने लगी. यह खोज मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है. हालांकि यह इलाज अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन भविष्य में यह लाखों लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकता है.
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