New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर भारत के मेडिकल टूरिज्म सेक्टर पर भी पड़ा है. दिल्ली-NCR, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे बड़े मेडिकल हब में विदेशी मरीजों की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आई है. इस सेक्टर से होने वाली कमाई में भी इसी अनुपात में गिरावट देखने को मिल रही है.
उड़ानों का रद्द होना सबसे बड़ी वजह
अब तक भारत में आने वाले कुल विदेशी मरीजों में 18 से 30 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया का रहा है. इसलिए वहां की स्थिति का सीधा असर इस सेक्टर पर पड़ा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह उड़ानों का रद्द होना और टिकटों की कीमतों में बढ़ोतरी है. भले ही कुछ रूट पर उड़ानें फिर शुरू हो गई हैं, लेकिन किराए में 15 से 25 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है, जिससे मरीजों का आना मुश्किल हो गया है.
यात्रा के लिए वैकल्पिक हवाई मार्ग उपलब्ध
दक्षिण भारत के अस्पतालों पर इस संकट का असर अपेक्षाकृत कम पड़ा है. इसकी वजह यह है कि वहां यात्रा के लिए वैकल्पिक हवाई मार्ग उपलब्ध हैं, जिससे कुछ मरीज अभी भी पहुंच पा रहे हैं. मेडिकल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले दो हफ्तों में स्थिति और गंभीर हो गई है. विदेश से आने वाले मरीजों की संख्या में 50 से 75 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है.
कमाई पर पड़ा है इस गिरावट का सीधा असर
खासतौर पर पश्चिम एशिया से आने वाले मरीजों की संख्या में करीब 75 प्रतिशत की कमी आई है. सर्विसेज़ एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के डायरेक्टर जनरल डॉ. अभय सिन्हा के अनुसार, इस गिरावट का सीधा असर कमाई पर पड़ा है. कई जगहों पर हर महीने की आय में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आई है, जबकि कुछ अस्पतालों में यह गिरावट 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
अब नए देशों की ओर ध्यान दे रहे हैं अस्पताल
दिल्ली के कुछ अस्पतालों में मेडिकल टूरिज्म से होने वाली आय 30-40 प्रतिशत तक घट गई है. लंबे समय तक असर रहने की आशंका को देखते हुए अस्पताल अब नए देशों और क्षेत्रों की ओर ध्यान दे रहे हैं. अब फोकस दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया (जैसे इंडोनेशिया और श्रीलंका), अफ्रीका (नाइजीरिया, केन्या, मॉरीशस) और मध्य एशिया के देशों पर किया जा रहा है.
अब नए मरीजों के रजिस्ट्रेशन में भारी गिरावट
इस स्थिति का असर खासतौर पर उन इलाजों पर पड़ा है, जिन्हें टाला जा सकता है. इनमें प्लास्टिक सर्जरी, बुजुर्गों का इलाज, हड्डियों से जुड़ी सर्जरी और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट शामिल हैं. डॉ. सिन्हा के अनुसार, शुरुआत में असर कम था क्योंकि कई मरीज पहले से बुकिंग कर चुके थे, लेकिन अब नए मरीजों के रजिस्ट्रेशन में भारी गिरावट आ गई है.
अंतरराष्ट्रीय मरीजों का आना रुक गया
अस्पतालों में अंतरराष्ट्रीय मरीजों का आना लगभग रुक गया है. फरवरी के आखिरी 10 दिनों की तुलना में मार्च के पहले 10 दिनों में मध्य-पूर्व से आने वाले मरीजों की संख्या में 75 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है.
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