गर्मी का बढ़ता प्रकोप, हीट स्ट्रोक से कैसे बचें? हेल्थ एक्सपर्ट की जानें सलाह

Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Heat Stroke: देश भर में गर्मी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है. दिन का तापमान लगातार चढ़ रहा है और लू चलने की संभावना भी बढ़ गई है. ऐसे में हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा हो जाता है. ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट इससे बचाव के लिए महत्वपूर्ण सलाह देते हैं.

कब होता है Heat Stroke

हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान बहुत तेजी से बढ़ जाता है और शरीर ठंडक बनाने की क्षमता को खो देता है. यह जानलेवा भी हो सकता है, इसलिए गर्मी के मौसम में सतर्क रहना बहुत जरूरी है. नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) ने आम लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतकर खुद को और अपने परिवार को हीट स्ट्रोक से बचाएं. समय पर सही बचाव और प्राथमिक उपचार अपनाकर इस गंभीर समस्या से बचा जा सकता है.

थोड़ी सी सावधानी से हीट स्ट्रोक को रोका जा सकता है

एनएचएम ने सभी से अपील की है कि गर्मी के मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का खास ध्यान रखें. उन्हें ज्यादा देर धूप में न रहने दें. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी से हीट स्ट्रोक को आसानी से रोका जा सकता है. गर्मी को मात देने के लिए हल्का भोजन करें, ठंडे पानी का इस्तेमाल करें और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करें.

पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

हीट स्ट्रोक से बचाव के आसान उपाय भी हैं जैसे- दोपहर के सबसे गर्म समय यानी 12 बजे से 4 बजे तक में भारी या ज्यादा मेहनत वाले काम करने से बचें. बाहर जाने से बचें. पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं. भले ही प्यास न लगे, फिर भी थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें. ज्यादा कैफीन या चीनी वाले ड्रिंक्स जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, चाय, कॉफी से बचें. ये शरीर को और डिहाइड्रेट कर सकते हैं. हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें. गहरे रंग के कपड़े ज्यादा गर्मी सोखते हैं. बाहर काम करते समय हर 15-20 मिनट में कुछ देर के लिए छांव में आराम करें.

लक्षण दिखने पर प्राथमिक उपचार पर ध्यान दें

हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर प्राथमिक उपचार पर ध्यान दें. अगर किसी व्यक्ति को हीट स्ट्रोक के लक्षण नजर आएं, जैसे चक्कर आना, उल्टी, तेज बुखार, बेहोशी या शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाना तो तुरंत पीड़ित व्यक्ति को किसी ठंडी और हवादार जगह पर लिटा दें. उनके शरीर पर ठंडी पट्टी या ठंडे पानी से सेक करें, खासकर गर्दन, कलाई, और पैरों के तलवों पर. उन्हें ठंडे पानी के छोटे-छोटे घूंट पिलाते रहें. हालत में सुधार होने पर नमी वाले हल्के फल या खाद्य पदार्थ व जूस दें.

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