Baby Care Tips: बच्चे के जन्म के बाद माता-पिता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि उसे ऐसा क्या दिया जाए, जिससे उसकी सेहत और विकास की मजबूत नींव तैयार हो सके. दरअसल, शिशु के जीवन के शुरुआती कुछ महीने बेहद संवेदनशील होते हैं और इस दौरान मिलने वाला पोषण व देखभाल उसके आगे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. खासतौर पर पहले 180 दिन यानी छह महीने बच्चे के लिए बेहद अहम माने जाते हैं.
इन छह महीनों में बच्चे की जरूरत सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं होती. उसे सही पोषण के साथ सुरक्षा, मां का स्पर्श और पर्याप्त देखभाल की भी जरूरत होती है. ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि जन्म के बाद बच्चे के लिए सबसे उपयुक्त आहार क्या है, पहले दूध को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है और छह महीने पूरे होने के बाद उसकी डाइट में किस तरह बदलाव किया जाता है.
पहले छह महीने क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण?
जन्म के बाद बच्चा तेजी से विकास के दौर से गुजरता है. इस दौरान उसके शरीर और प्रतिरोधक क्षमता को पोषण की जरूरत होती है. पहले छह महीने इसलिए भी खास होते हैं क्योंकि इसी अवधि में बच्चे के लिए भोजन और देखभाल से जुड़ी सही आदतों की शुरुआत होती है. विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, इस दौरान बच्चे को उसकी जरूरत के मुताबिक पोषण देना बेहद जरूरी है. मां का दूध इस जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है.
मां का पहला दूध बच्चे के लिए बेहद खास
जन्म के बाद मां के स्तनों से निकलने वाले पहले दूध को कोलोस्ट्रम कहा जाता है. यह गाढ़ा और हल्के पीले रंग का होता है. इसे नवजात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसमें जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं. कोलोस्ट्रम बच्चे के शुरुआती विकास के साथ उसकी प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करने में मदद करता है. इसलिए जन्म के बाद मिलने वाला मां का पहला दूध बच्चे के लिए बेहद अहम होता है.
छह महीने तक सिर्फ स्तनपान
बच्चे के जीवन के पहले छह महीने तक केवल स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है. इस दौरान सामान्य तौर पर बच्चे को अलग से पानी, शहद या अन्य खाद्य पदार्थ देने की जरूरत नहीं होती. मां का दूध बच्चे को पोषण के साथ जरूरी तरल भी उपलब्ध कराने में मदद करता है. इसलिए शुरुआती छह महीनों में बच्चे की डाइट में अपनी तरफ से कोई दूसरी चीज शामिल करने के बजाय डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है.
स्तनपान से सिर्फ पोषण नहीं, भावनात्मक जुड़ाव भी
स्तनपान का संबंध केवल बच्चे के पोषण से नहीं है. जब मां बच्चे को अपनी गोद में लेकर दूध पिलाती है, तो दोनों के बीच भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है. मां का स्पर्श, उसकी गोद और बच्चे को मिलने वाला अपनापन उसके भावनात्मक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है. यही वजह है कि शुरुआती महीनों में बच्चे को पर्याप्त प्यार और सुरक्षित माहौल देना भी उसकी देखभाल का अहम हिस्सा है.
छह महीने बाद बच्चे की डाइट में क्या बदलता है?
छह महीने पूरे होने के बाद बच्चे की पोषण संबंधी जरूरतें पहले की तुलना में बढ़ने लगती हैं. इस समय स्तनपान के साथ पूरक आहार शुरू किया जाता है. बच्चे की उम्र और जरूरत के अनुसार नरम, पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन धीरे-धीरे उसकी डाइट में शामिल किया जा सकता है. नए आहार की शुरुआत करते समय बच्चे की उम्र और उसकी व्यक्तिगत जरूरतों का ध्यान रखना जरूरी है. हालांकि, पूरक आहार शुरू होने के बाद भी स्तनपान जारी रखना महत्वपूर्ण है. इस तरह पहले 180 दिनों में मिले पोषण की नींव को आगे भी बेहतर तरीके से बनाए रखा जा सकता है.
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