158 साल बाद फिर दिखा दुर्लभ पौधा, अरुणाचल प्रदेश में वैज्ञानिकों ने की ऐतिहासिक खोज

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Cyananthus hookeri Found After 158 Years: भारत का पूर्वोत्तर हिमालय एक बार फिर अपनी अनमोल जैव विविधता को लेकर चर्चा में है. अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में वैज्ञानिकों ने एक ऐसे दुर्लभ पौधे की फिर से पहचान की है, जिसे करीब 158 वर्षों से किसी ने नहीं देखा था. इस पौधे का नाम ‘सैयान्थस हूकेरी’ (Cyananthus hookeri) है. वनस्पति वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज केवल भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक जैव विविधता संरक्षण के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. लंबे समय बाद इस प्रजाति का दोबारा मिलना वैज्ञानिकों के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं माना जा रहा.

3600 मीटर की ऊंचाई पर मिला दुर्लभ पौधा

वनस्पति सर्वेक्षण के दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के मागो गांव के पास स्थित चुना घाटी में लगभग 3600 मीटर की ऊंचाई पर इस दुर्लभ पौधे को खोजा. कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में मिले इस पौधे ने वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. वैज्ञानिकों के अनुसार, सैयान्थस हूकेरी को इससे पहले वर्ष 1867 में सिक्किम में दर्ज किया गया था. उस समय प्रसिद्ध ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक जोसेफ डाल्टन हूकर ने इसका वैज्ञानिक विवरण तैयार किया था. इसके बाद यह पौधा दशकों तक वैज्ञानिकों की नजरों से पूरी तरह गायब रहा.

नीले-बैंगनी घंटीनुमा फूल हैं इसकी सबसे बड़ी पहचान

‘सैयान्थस हूकेरी’ कैंपानुलेसी (Campanulaceae) यानी बेलफ्लावर परिवार का एक दुर्लभ फूलदार पौधा है. यह मुख्य रूप से पूर्वी हिमालय के ठंडे और ऊंचाई वाले इलाकों में पाया जाता है. इस पौधे की सबसे खास पहचान इसके नीले और बैंगनी रंग के घंटी के आकार वाले आकर्षक फूल हैं. यही अनोखी बनावट इसे अन्य पौधों से अलग बनाती है और वनस्पति वैज्ञानिकों के लिए इसे बेहद महत्वपूर्ण प्रजाति माना जाता है.

भारत में बची हैं बेहद कम प्रजातियां

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि भारत में सैयान्थस हूकेरी की 50 से भी कम परिपक्व (मैच्योर) प्रजातियां मौजूद हैं. इतनी कम संख्या में पाए जाने के कारण यह पौधा विलुप्त होने के गंभीर खतरे का सामना कर रहा है. इस महत्वपूर्ण खोज को अंतरराष्ट्रीय संरक्षण पत्रिका Oryx में भी प्रकाशित किया गया है, जिससे इस दुर्लभ प्रजाति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और वैज्ञानिक महत्व मिला है.

संरक्षण के लिए वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस दुर्लभ पौधे के प्राकृतिक आवास की समय रहते सुरक्षा नहीं की गई, तो भविष्य में यह प्रजाति हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है. इसी वजह से वैज्ञानिकों ने IUCN की संकटग्रस्त (Endangered) प्रजातियों की सूची में सैयान्थस हूकेरी को शामिल करने की सिफारिश की है. उनका मानना है कि ऐसा होने पर इस पौधे के संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे.

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