सेतुबंधासन के फायदे
आयुष मंत्रालय के अनुसार, सेतुबंधासन मानसिक तनाव और अवसाद के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है. इसके अभ्यास से शरीर को आराम मिलता है और मन को शांत रखने में मदद मिल सकती है. यह आसन पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करता है और पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज में सहायक हो सकता है. सेतुबंधासन के दौरान छाती का हिस्सा खुलता है और सांस लेने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलता है.
इससे सांस लेने में सहजता महसूस हो सकती है. यह आसन गर्दन और कमर पर अनावश्यक दबाव डाले बिना सही तकनीक से किया जाए, तो रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करने और शरीर में लचीलापन बनाए रखने में मदद कर सकता है. नियमित और सही अभ्यास से थकान कम महसूस करने, शरीर को सक्रिय रखने और आरामदायक नींद की दिनचर्या बनाने में भी मदद मिल सकती है. हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए. थायराइड, हार्मोन संबंधी समस्या या सांस की बीमारी होने पर केवल इस आसन के भरोसे उपचार नहीं करना चाहिए.
महिलाओं के लिए भी हो सकता है सहायक
सेतुबंधासन महिलाओं के लिए भी एक उपयोगी योग अभ्यास हो सकता है. इसके दौरान शरीर में हल्का खिंचाव आता है और आराम महसूस हो सकता है. मासिक धर्म के दौरान होने वाली परेशानी या मेनोपॉज से जुड़े तनाव, गर्मी लगने और मूड में बदलाव जैसी समस्याओं में योग कुछ लोगों को राहत देने में मदद कर सकता है. हालांकि, हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है और इन समस्याओं के लिए चिकित्सकीय सलाह जरूरी होने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
सेतुबंधासन करने का सही तरीका
सबसे पहले किसी समतल जगह पर योग मैट बिछाकर पीठ के बल लेट जाएं. दोनों घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखें. पैरों के बीच लगभग कूल्हों जितनी दूरी रखें और हाथों को शरीर के दोनों ओर सीधा रखें. अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए पैरों और कंधों की मदद से कूल्हों को ऊपर उठाएं. कोशिश करें कि घुटने एक-दूसरे के समानांतर रहें और गर्दन पर दबाव न पड़े.
अपनी सुविधा के अनुसार कुछ सेकंड इसी स्थिति में रहें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें. फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे कूल्हों को वापस जमीन पर ले आएं. शुरुआत में इस आसन को थोड़ी देर ही करें. शरीर में दर्द या असहजता महसूस होने पर अभ्यास रोक दें. बेहतर होगा कि पहली बार किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में इसे सीखें.
किन लोगों को सेतुबंधासन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए?
यदि गर्दन, कंधे या रीढ़ की हड्डी में हाल ही में चोट लगी है या गंभीर दर्द है, तो इस आसन का अभ्यास करने से परेशानी बढ़ सकती है. रीढ़ की हड्डी में अत्यधिक जकड़न या कोई गंभीर विकार होने पर योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह के बिना इसे न करें. अभ्यास के दौरान गर्दन को इधर-उधर न घुमाएं और शरीर को जबरदस्ती ऊपर उठाने की कोशिश न करें. यदि दर्द, चक्कर या किसी तरह की असहजता महसूस हो, तो तुरंत आसन से बाहर आ जाएं.
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