Viparitakarani Asana: रोजाना करें विपरीतकरणी आसन, शरीर को मिलेगी नई ऊर्जा और मन रहेगा शांत

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Viparitakarani Asana: योग को शरीर और मन के बीच संतुलन बनाने वाली प्राचीन विद्या माना जाता है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शारीरिक थकान, तनाव और पाचन से जुड़ी परेशानियां आम हो गई हैं. ऐसे में नियमित योग अभ्यास शरीर को आराम देने के साथ मानसिक तनाव कम करने में भी मदद कर सकता है. इन्हीं योगासनों में विपरीतकरणी आसन को एक सरल और विश्राम देने वाला अभ्यास माना जाता है.

विपरीतकरणी संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है. इसमें ‘विपरीत’ का अर्थ उलटा और ‘करणी’ का अर्थ करना होता है. इस आसन में पैरों को ऊपर की ओर उठाया जाता है. इसे आधुनिक योग में अक्सर दीवार के सहारे किया जाता है. यह अपेक्षाकृत सरल अभ्यास है और इसके नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिल सकती है.

क्या है विपरीतकरणी आसन?

आयुष मंत्रालय के अनुसार, विपरीतकरणी आसन एक प्रभावी और विश्रामकारी योग अभ्यास है. इसका शाब्दिक अर्थ उलटी क्रिया वाला आसन या प्रवाह को मोड़ने वाला आसन होता है. इस आसन में शरीर की स्थिति ऐसी होती है कि पैर ऊपर की ओर रहते हैं. यही वजह है कि इसे गुरुत्वाकर्षण के विपरीत किया जाने वाला अभ्यास माना जाता है. नियमित अभ्यास से शरीर को आराम मिलने के साथ थकान कम महसूस हो सकती है.

पैरों से हृदय की ओर बेहतर हो सकता है रक्त प्रवाह

विपरीतकरणी आसन के दौरान पैर शरीर के ऊपरी हिस्से की तुलना में ऊपर रहते हैं. आयुष मंत्रालय के अनुसार, गुरुत्वाकर्षण के विपरीत इस स्थिति से पैरों और शरीर के निचले हिस्से से रक्त का प्रवाह वापस हृदय और मस्तिष्क की ओर सुचारू रूप से बढ़ने में मदद मिल सकती है. इसी वजह से लंबे समय तक खड़े रहने या दिनभर की थकान के बाद यह आसन शरीर को आराम देने वाले अभ्यास के तौर पर किया जाता है.

थायरॉयड से जुड़ी समस्या में मदद का दावा

विपरीतकरणी मुद्रा को थायरॉयड नियंत्रण से भी जोड़ा जाता है. आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन हाइपोएक्टिव थायरॉइड से जुड़ी समस्याओं को मैनेज करने में सहायक हो सकता है. हालांकि, किसी थायरॉयड समस्या में इसे इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित उपचार को प्राथमिकता देना जरूरी है.

तनाव कम करने और मन को शांत करने में मदद

विपरीतकरणी आसन का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं माना जाता. इसके अभ्यास से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को शांत करने में मदद मिल सकती है. इससे मानसिक सतर्कता बेहतर होने और तनाव से राहत मिलने में सहायता मिल सकती है. दिनभर काम या दूसरी गतिविधियों के कारण मानसिक थकान महसूस करने वाले लोगों के लिए यह एक आरामदायक योग अभ्यास हो सकता है.

भूख और पाचन के लिए भी फायदेमंद

जिन लोगों को भूख कम लगती है, उनके लिए भी विपरीतकरणी आसन को उपयोगी बताया गया है. इसके नियमित अभ्यास से जठराग्नि तीव्र होने, भूख बढ़ने और पाचन क्रिया बेहतर होने में मदद मिल सकती है. हालांकि, लगातार भूख कम लगने या पाचन संबंधी समस्या रहने पर केवल योग पर निर्भर रहने के बजाय इसके कारण की जांच कराना जरूरी है.

कितनी देर करें विपरीतकरणी आसन?

विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में विपरीतकरणी आसन का अभ्यास 5 से 10 मिनट तक किया जा सकता है. शरीर अभ्यास का आदी होने के बाद धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है. नियमित अभ्यास से शरीर और मन के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

गर्भवती महिलाओं, हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों और किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे मरीजों को विपरीतकरणी आसन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए. योग का अभ्यास अपनी शारीरिक क्षमता और विशेषज्ञ की उचित सलाह के अनुसार करना बेहतर होता है.

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