ओडिशा में STF ने 75 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकडा, फर्जी भारतीय पासपोर्ट हासिल करने वाले भी दो गिरफ्तार

Odisha: ओडिशा में 75 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकडा गया है. इनमें से 49 बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित किया जा चुका है. गंजाम और कंधमाल में फर्जी भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया है. वहीं जगतसिंहपुर के 21 और केंद्रापड़ा के 3 बांग्लादेशी नागरिक फिलहाल निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा में हैं. यह जानकारी सरकार ने अपने हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामा में दर्शाया है.

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल किया विस्तृत हलफनामा

बता दें कि बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान, गिरफ्तारी और निर्वासन को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है. सरकार ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार राज्य के सभी जिलों में विशेष टास्क फोर्स (STF) का गठन किया गया है जो अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान और कार्रवाई कर रही है.

अधिवक्ता महांति की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस एम.एस. रमण की खंडपीठ के समक्ष अधिवक्ता शिवशंकर महांति की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. राज्य सरकार की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि केंद्रीय और राज्य गृह विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुपालन के लिए सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों और विदेशी पंजीकरण अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं.

दो राज्यस्तरीय और 19 जिलास्तरीय होल्डिंग सेंटर स्थापित

खुफिया निदेशक आरपी कोचे द्वारा दाखिल हलफनामे में बताया गया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार राज्य में दो राज्यस्तरीय होल्डिंग सेंटर और 19 जिलास्तरीय होल्डिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं. संदेह के आधार पर विभिन्न जिलों में कुल 2259 लोगों की जांच की गई, जिनमें से 2176 भारतीय नागरिक पाए गए और उन्हें छोड़ दिया गया.

75 लोग बांग्लादेशी नागरिक के रूप में चिह्नित

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भुवनेश्वर शहरी पुलिस जिले में 24, कटक में 15, बरहमपुर में 6, केंद्रापड़ा में 3, गंजाम में 1, जगतसिंहपुर में 21, कंधमाल में 4 और कोरापुट में 1. इस तरह कुल 75 लोगों को बांग्लादेशी नागरिक के रूप में चिह्नित किया गया है. इनमें से 49 बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित किया जा चुका है.

कुछ स्थानीय लोकप्रिय मोबाइल एप्स की मदद लेने के निर्देश

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि STF के साथ खुफिया ब्यूरो की जिला इकाइयों और स्पेशल ब्रांच को भी अभियान में लगाया गया है. जांच के दौरान बांग्लादेश के कुछ स्थानीय लोकप्रिय मोबाइल एप्स की मदद लेने के निर्देश जिला अधिकारियों, रेंज डीआईजी और आईजी को दिए गए हैं. मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को होगी. याचिकाकर्ता की ओर से स्वयं शिवशंकर महांति और राज्य सरकार की ओर से एजी, देवाशीष त्रिपाठी ने पक्ष रखा.

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