Patna: बिहार की राजधानी पटना का नाम बदल जाएगा. सीएम सम्राट चौधरी ने इसकी घोषणा की है. उन्होंने कहा कि पटना का नाम बदलकर अब पाटलिपुत्र रखा जाएगा. साथ ही सीएम ने कहा कि बिहार में टाउनशिप बनेगा तो बिहार बदलेगा. टाउनशिप बनने के दौरान किसी को भी नुकसान नहीं पहुचेगा. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को फुलवारीशरीफ के नदियावां गांव में आयोजित प्रखंड सहयोग सह जनकल्याण शिविर में भाग लिया.
इतिहास करीब तीन हजार साल पुराना
पटना का इतिहास करीब तीन हजार साल पुराना है. प्राचीन काल में शिक्षा, संस्कृति और राजनीति का मुख्य केंद्र रहा यह शहर कभी मगध साम्राज्य की राजधानी था. यहीं से चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक जैसे महान शासकों ने शासन किया. शुरुआत में यह एक छोटा सा गांव था, जहां पाटलि (एक औषधीय पौधा) के वृक्षों की बहुतायत थी. इस कारण इसे ‘पाटलिग्राम’ कहा गया. विकास के साथ यह नगर बना और ‘पाटलिपुत्र’ कहलाया.
व्यापार का बड़ा केंद्र
गंगा नदी के किनारे बसे होने के कारण यह व्यापार का बड़ा केंद्र था. यहां जहाजों से माल की ढुलाई होती थी. एक मानव-निर्मित बंदरगाह होने की वजह से इसे ‘पत्तन’ भी कहा जाने लगा. जिससे इसका नाम ‘पाटलिपत्तन’ पड़ा. जानकारों के अनुसार, समय के साथ ‘पत्तन’ शब्द का अपभ्रंश हुआ और यह ‘पटना’ बन गया. मध्यकाल में 16वीं शताब्दी (1538-1545 ईस्वी) के दौरान शासक शेरशाह सूरी ने आधिकारिक तौर पर इसका नाम पाटलिपुत्र से बदलकर ‘पटना’ कर दिया.
पुरानी पहचान ‘पाटलिपुत्र’ लौटाने की मांग
तब से आज तक इसे इसी नाम से जाना जाता है. हालांकि, अब एक बार फिर इस ऐतिहासिक शहर को उसकी पुरानी पहचान ‘पाटलिपुत्र’ लौटाने की मांग तेज होने लगी है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विकास, कानून-व्यवस्था, उद्योग, किसानों के हित और पटना के भविष्य को लेकर सरकार की योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अपराधियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है. उन्हें नेपाल ही भागना होगा, क्योंकि यूपी में योगी बाबा, पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी दादा और बिहार में सम्राट बैठा है.
पटना के कई इलाकों में जलजमाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वह नगर विकास मंत्री थे, तब पटना के कई इलाकों में जलजमाव सबसे बड़ी समस्या थी. पानी निकालने में काफी मुश्किल होती थी. विशेष रूप से कंकड़बाग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कभी इसे एशिया का सबसे बड़ा टाउनशिप कहा जाता था, लेकिन समय के साथ वहां बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियां बढ़ गईं. मुख्यमंत्री ने किसानों के हितों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार जल्द ही कैबिनेट में ऐसे प्रस्ताव लाएगी, जिनसे किसानों को वर्तमान से अधिक मुआवजा मिल सके.
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार फैसले ले रही है. सम्राट चौधरी ने कहा कि जिन परिवारों के सामने अचानक कोई संकट, आपदा या शादी-विवाह जैसी जरूरतें आती हैं, उनकी मदद के लिए जिलाधिकारियों को विशेष अधिकार दिए गए हैं. जरूरत पड़ने पर प्रशासन तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगा, ताकि किसी परिवार को कठिन परिस्थिति में परेशानी का सामना न करना पड़े.
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