शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत…Gen Z को बधाई, धर्मेंद प्रधान के इस्तीफे पर बोले सोनम वांगचुक

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Sonam Wangchuk: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बीच आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना इस्तीफा देना पड़ा है, जिसे अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लोकतंत्र की जीत बताया है. बता दें कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है.

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा कि “यह लोकतंत्र की जीत है. डॉयरेक्ट डेमोक्रेसी… जो सड़कों से निकला है. ये शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है. CJP और देश की ‘जेन जी’ (Gen Z) को बधाई, और उन सभी नागरिकों का धन्यवाद, जिन्होंने डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज़ उठाई. जवाबदेही से अब सुधार की ओर.”

छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित

वहीं, इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं. मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है. मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं.

युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हमारा संकल्प

उन्होंने लिखा कि भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है. पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ, उसके लिए मैं प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करता हूं. उन्होंने कहा कि 3 मई को हुई नीट यूजी की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई. भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया और पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई.

इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी मोड में करने का निर्णय लिया गया. इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए. इसके लिए सरकार का समग्र दृष्टिकोण के तहत काम किया गया. इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही. साथ ही छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून को यह परीक्षा पूर्ण हुई.

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