Mukul Choudhary: आईपीएल 2026 में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के बीच हुए मुकाबले में मुकुल चौधरी स्टार बनकर उभरे. दाएं हाथ के 21 साल के इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने मात्र 27 गेंदों पर 7 छक्कों और 1 चौके की मदद से नाबाद 54 रन की पारी खेल एलएसजी को 3 विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
मैं हमेशा एमएस धोनी को देखता हूं- Mukul Choudhary
मैच के बाद जियोहॉटस्टार पर मुकुल चौधरी ने कहा, “मैं हमेशा एमएस धोनी को देखता हूं क्योंकि मैं भी एक फिनिशर हूं. मैं हमेशा उनसे प्रेरणा लेता हूं. उनका हेलीकॉप्टर शॉट, जो बहुत आइकॉनिक है, मेरा पसंदीदा है. जिस तरह से उन्होंने 2011 वर्ल्ड कप में भारत का नेतृत्व किया, वह सबको याद है. मैं उनके जैसा बनना चाहता हूं और मैच फिनिश करके अपनी टीम को जिताने में मदद करना चाहता हूं.”
अपने पिता के त्याग को लेकर कही ये बात
अपने पिता के त्याग और क्रिकेट खेलने के सफर पर मुकुल ने कहा, “मेरे पिता का सपना था कि मैं बड़े स्तर पर क्रिकेट खेलूं. हम बहुत गरीब परिवार से हैं और वह चाहते थे कि परिवार से कोई क्रिकेट खेले. आजकल क्रिकेट में बहुत पैसा और नाम है. क्रिकेट उनका पसंदीदा खेल है, लेकिन हमारे परिवार के हालात उन्हें पेशेवर क्रिकेट खेलने की इजाजत नहीं देते थे. उन्होंने शादी से पहले ही मन बना लिया था कि जब उनका बेटा होगा, तो उसे क्रिकेट खिलाना है. जब मैं छोटा था, तो हमारे परिवार के हालात ठीक नहीं थे और उनके लिए मुझे क्रिकेट एकेडमी में एडमिशन दिलाना मुमकिन नहीं था. उस समय, वह एक कॉलेज में पढ़ाते भी थे और आरएएस की तैयारी भी कर रहे थे.”
उन्होंने अपनी आरएएस की तैयारी छोड़ दी
चौधरी ने कहा, “उनके पिता को यह समझ आया कि या तो वह राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) की तैयारी कर सकते हैं या वह मुझे प्रोफेशनल क्रिकेट खिला सकते हैं. इसलिए, उन्होंने अपनी आरएएस की तैयारी छोड़ दी, कुछ प्रॉपर्टी का काम किया और पैसे कमाए. मैं जब 12 साल का हुआ, तो उन्होंने मुझे पहली बार सीकर शहर में एसबीएस क्रिकेट एकेडमी में एडमिशन दिलाया.”
मेरे परिवार में क्रिकेट से कोई संपर्क नहीं था
मुकुल ने कहा, “हमारे सामने चुनौती यह थी कि पेशेवर स्तर पर खेलना शुरू करने से पहले मुझे क्रिकेट के बारे में कुछ नहीं पता था. मेरे परिवार में क्रिकेट से कोई संपर्क नहीं था. हमारे क्षेत्र का कोई भी क्रिकेट खिलाड़ी नहीं था. मुझे इस खेल के बारे में कुछ नहीं पता था. मुझे याद है 2015 में, उस दिन मेरा जन्मदिन था और मैं और मेरे पापा सुबह एकेडमी ढूंढने निकले थे. आस-पास तीन जिले थे – चूरू, झुंझुनू और सीकर. हम उन तीन जिलों में एकेडमी ढूंढ रहे थे. उस समय, सीकर में एसबीएस क्रिकेट एकेडमी अभी-अभी खुली थी. हमने उसे वहां देखा और उस एकेडमी में एडमिशन लेने का फैसला किया. वह एक नई एकेडमी थी और एकेडमी चलाने वाले लोग क्रिकेट के बहुत शौकीन और पैशनेट थे. इसलिए हमें अपनी क्रिकेट जर्नी शुरू करने के लिए सही जगह मिली.”