Islamabad: पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है. अभी हाल ही में बलूचिस्तान प्रांत में माइनॉरिटी समुदायों और सिविल सोसायटी ग्रुप्स के बीच क्वेटा में आर्चर रोड पर शापिंग प्लाजा बनाने के लिए 100 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे तथा एक पुराने क्रिश्चियन स्कूल को गिरा दिया गया था. अब इसका विरोध शुरू हो गया है. इस विवाद ने अब सिख, ईसाई और हिंदू वाल्मीकि प्रतिनिधियों को एक साथ ला दिया है.
एक ज्वाइंट गठबंधन बनाया
तीनों समुदायों ने बलूचिस्तान के तहत एक ज्वाइंट गठबंधन बनाया है ताकि माइनॉरिटी प्रॉपर्टी पर और कथित कब्जे का विरोध किया जा सके और अधिकारियों पर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए दबाव डाला जा सके. इस बीच पाकिस्तान ने शुक्रवार को उन आरोपों को खारिज कर दिया कि देश में करीब 100 साल पुराने एक हिंदू मंदिर को जान-बूझकर गिरा दिया गया था. पाकिस्तान ने दावा किया कि भारी बारिश के कारण मंदिर के ढांचे को नुकसान पहुंचा था.
125 साल पुराने एक हिंदू मंदिर को ढहाया
यह मंदिर पंजाब प्रांत के नरोवाल इलाके के सिराज गांव में था. बता दें कि पाकिस्तान में पिछले हफ्ते पंजाब में 125 साल पुराने एक हिंदू मंदिर को कथित तौर पर ढहा दिया गया, ताकि वहां एक मदरसे के लिए जगह बनाई जा सके. अब इस तोड़फोड़ को लेकर अल्पसंख्यक अधिकार संगठन और धार्मिक संपत्तियों का प्रबंधन करने वाली सरकारी संस्था के बीच विवाद शुरू हो गया है. अल्पसंख्यक समूह के विरोध के बीच सरकार ने साफ किया कि मंदिर का सिर्फ एक हिस्सा टूटा था और वह भी भारी बारिश की वजह से.
मंदिर को 21 अगस्त को ढहाया
अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी के मुताबिक नरोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित इस मंदिर को 21 अगस्त को ढहा दिया गया था. हालांकिए संगठन ने दावा किया कि मंदिर के पास स्थित एक धार्मिक स्कूल के विस्तार के लिए इस इमारत को जानबूझकर तोड़ा गया था. डॉन अखबार ने यह खबर दी.
इसे भी पढ़ें. China Landslide: चीन में तूफान ‘सॉडेल’ का कहर, जियांग्शी में भूस्खलन, एक की मौत, 11 लापता

