Ali Jafari : अमेरिका-इजरायल ने शनिवार को ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी लॉन्च किया था, जो कि अब तक जारी है. बता दें कि उनके इस ऑपरेशन में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और आईआरजीसी (IRGC) के टॉप जनरल मारे गए. ऐसे में दोनों देशों के बीच इस घटना ने 2003 के इराक हमले की याद दिला दी, जानकारी के मुताबिक, जब 2003 में सद्दाम हुसैन का सैन्य ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह गया था.
प्राप्त जानकारी के अनुसार अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के 14 दिन बीत जाने के बाद भी ईरान इस लड़ाई में टिका है और साथ ही पूरे मिडिल ईस्ट को हिलाकर रख दिया है. बता दें कि ईरान के इस हैरान कर देने वाले प्रतिरोध के पीछे मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफरी की सैन्य रणनीति को कारगर माना जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, जाफरी ने 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले का बारीकी से अध्ययन किया था. ऐसे में उन्होंने पाया कि इराकी सेना की सबसे बड़ी कमजोरी अत्यधिक केंद्रीकृत कमान ढांचा था और सद्दाम हुसैन के आदेश के बिना इराकी कमांडर एक कदम भी नहीं हिला सकते थे इसलिए वो अमेरिका से हार गए.
मोजेक डिफेंस सिस्टम
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इराक से सबक लेते हुए जनरल जाफरी ने आईआरजीसी को ईरान के 31 राज्यों के आधार पर 31 सेमी ऑटोनॉमस कमांड में बांट दिया और इसका नाम मोजेक डिफेंस सिस्टम दिया गया. इसका अर्थ है सेना को छोटी-छोटी स्वतंत्र टुकड़ियों में बांट देना. इसके साथ ही जाफरी ने प्रत्येक प्रांत का स्वतंत्र मुख्यालय, कम्युनिकेशन सिस्टम, मिसाइल, ड्रोन भंडार और खुफिया संपत्तियां बनाई हैं और साथ ही स्पष्ट रूप से ये निर्देश दिए गए हैं कि अगर तेहरान के साथ संपर्क टूट जाए या केंद्रीय नेतृत्व खत्म हो जाए तो भी वे पहले से तय योजना के अनुसार स्वतंत्र रूप से युद्ध जारी रख सकते हैं.
ईरान की जवाबी कार्रवाई में कोई कमी नहीं
बता दें कि ईरान की भौगोलिक स्थिति ऊंचे पहाड़ और विशाल आंतरिक हिस्से का उपयोग करते हुए जाफरी ने ये रणनीति बनाई है. उनका कहना है कि इससे दुश्मन की सेना को लंबे और थका देने वाले युद्ध में फंसाया जा सकता है. हालांकि अमेरिका ने ईरानी रक्षा मंत्री के अलावा आईआरजीसी के टॉप कमांडरों को मार गिराया है, लेकिन इतना करने के बाद भी ईरान की जवाबी कार्रवाई में कोई कमी नहीं आई.
तेल रिफाइनरी और समुद्री टर्मिनल को बनाया निशाना
इतना ही नही बल्कि ईरान के प्रांतीय कमांडरों ने स्वतंत्र रूप से काम करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट में बुनियादी ढांचे जैसे तेल रिफाइनरी और समुद्री टर्मिनल को निशाना बनाया है. जहां ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन तटस्थ देशों से माफी मांग रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर आईआरजीसी यूनिट अपनी पूर्व-निर्धारित विनाशकारी योजना पर टिकी हुई है. बता दें कि जनरल जाफरी ने जो बीज 2005 में बोया था, वो आज 2026 में ईरान के अस्तित्व की रक्षा कर रहा है.
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