New Delhi: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को रोकने के लिए चीन और पाकिस्तान ने मिलकर पांच सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश किया है. जिसका उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और स्थिरता बहाल करना है. चीन-पाकिस्तान की यह पहल कागज पर शांति की दिशा में एक कदम जरूर लगती है, लेकिन इसके पीछे की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं. चीन और पाकिस्तान ने भले ही 5 सूत्रीय शांति योजना पेश की हो, लेकिन इस पहल को लेकर कई देशों और विश्लेषकों के बीच संदेह गहराता जा रहा है.
शांति की कोशिश है या रणनीतिक चाल?
सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह वाकई शांति की कोशिश है या फिर एक रणनीतिक चाल? यह प्रस्ताव उस समय आया है जब United States और Iran के बीच संघर्ष चरम पर है. ऐसे में चीन और पाकिस्तान की पहल को कुछ लोग “टाइमिंग आधारित कूटनीति” मान रहे हैं, जिसका मकसद युद्ध रोकना नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करना हो सकता है.
5 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर सवाल
यह प्रस्ताव उस समय सामने आया जब पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar ने बीजिंग का दौरा किया और वहां चीन के विदेश मंत्री Wang Yi के साथ बैठक की. लेकिन China और Pakistan के 5 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर सवाल उठ रहे हैं. इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से तुरंत युद्धविराम, जल्द से जल्द शांति वार्ता शुरू करना, आम नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों की सुरक्षा, ऊर्जा, बिजली और परमाणु ढांचे पर हमले रोकना, अंतरराष्ट्रीय कानून और United Nations चार्टर का पालन आदि बातें शामिल हैं
जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर जोर
दोनों देशों ने खासतौर पर Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर जोर दिया. यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है. चीन ने यह भी बताया कि उसके तीन तेल टैंकर सुरक्षित रूप से इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं, जिसके लिए उसने संबंधित पक्षों का धन्यवाद किया.
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