France Gen Z Protest: ढाका और काठमांडू में छात्रों के उग्र आंदोलन के बाद सत्ता परिवर्तन की जो पटकथा लिखी गई थी, उसकी आहट अब फ्रांस में सुनाई देने लगी है. ऐसे में पेरिस समेत कई बड़े शहरों में किताबें छोड़कर लाखों स्कूली छात्र सड़कों पर उतर आए हैं. बांग्लादेश और नेपाल की तरह फ्रांस में भी जेन-जी (Gen Z) पीढ़ी का यह गुस्सा सिर्फ शिक्षण व्यवस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि इमैनुएल मैक्रों सरकार की आर्थिक नीतियों, शिक्षा सुधारों और युवाओं के सिकुड़ते भविष्य को लेकर फूटा है.
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हाई स्कूलों के गेट जाम कर बैठे इन युवा प्रदर्शनकारियों की मांग है कि शिक्षा बजट में कटौती तुरंत वापस ली जाए, छात्रों के भत्तों में बढ़ोतरी हो और रोजगार से जुड़ी नीतियों में सुधार किया जाए. युवाओं के इस अभूतपूर्व आक्रोश ने फ्रांस के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. विश्लेषक इसे एशिया के हालिया जनआंदोलनों की तर्ज पर देख रहे हैं, जहां युवाओं की लामबंदी ने दशकों पुरानी सरकारों की चूलें हिला दी थीं.
पेरिस के ‘लिसी वोल्टेयर’ स्कूल में पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने गार्डियन से कहा, “हमें उम्मीद है कि यह युवाओं का एक बहुत बड़ा विरोध आंदोलन बन जाएगा.” वह अपना असली नाम नहीं बताना चाहती थी. वह सैकड़ों दूसरे छात्रों के साथ मिलकर स्कूल का गेट ब्लॉक करने के दूसरे दिन वहां मौजूद थी, ताकि सभी क्लास रद्द हो जाएं. उसने कहा कि “हम बस इतना चाहते हैं कि सरकार हमारी बात सुने. खराब हालात में पढ़ाई करने के बजाय हम यहां खड़े होकर विरोध करना बेहतर समझते हैं. अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का एकमात्र यही तरीका है.”
सोफिया ने कहा, “शिक्षा के बजट में भारी कटौती की जा रही है, जबकि सेना को बहुत ज़्यादा अतिरिक्त फ़ंडिंग दी जा रही है.” सोफिया आगे चलकर आर्ट की पढ़ाई करना और एनिमेशन के क्षेत्र में काम करना चाहती हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि विरोध-प्रदर्शन और रास्ते रोकने का सिलसिला अगले हफ़्ते भी जारी रहेगा. कई शिक्षक समर्थन में बैरिकेड्स के पास खड़े थे.
प्रदर्शन कर रहे कई स्कूली छात्रों ने सरकार पर माध्यमिक शिक्षा से पल्ला झाड़ने का आरोप लगाया है. उन्होंने क्लासरूम की मुश्किल स्थितियों का ज़िक्र किया है, जैसे क्लास के दौरान छत का कुछ हिस्सा गिरना, पानी का टपकना, कॉकरोच और जर्जर इमारतें. कुछ छात्रों ने स्कूल के बहुत लंबे समय और टीचिंग स्टाफ़ की कमी की भी बात कही है.

