भारत का समंदर में नया खेल, होर्मुज के पार भेजेगा अपने खाली टैंकर, लद के आएगी LPG गैस 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
India energy security:  भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए खाली टैंकरों को भेजकर वहां से तेल और गैस लाने की योजना बना रही है. इस पूरे ऑपरेशन में विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय और भारतीय नौसेना मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि संकट के बीच भी देश की ऊर्जा सप्लाई बाधित न हो.
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय सबसे संवेदनशील इलाकों में से एक बना हुआ है. यहां पहले फंसे 24 भारतीय जहाजों में से अब भी 20 जहाज मौजूद हैं, जिन पर 600 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं. हालांकि, चार भारतीय जहाज सुरक्षित भारत लौट चुके हैं, जो बड़ी राहत की खबर है. सरकार लगातार अन्य देशों के साथ संपर्क में है, ताकि बाकी जहाजों को भी सुरक्षित निकाला जा सके.

अरब सागर तक एस्कॉर्ट किए जा रहे जहाज

बता दें कि भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी में कई युद्धपोत तैनात किए हैं, जो भारत आने वाले टैंकरों को सुरक्षा दे रहे हैं. ये युद्धपोत सीधे होर्मुज में नहीं जा रहे, बल्कि जैसे ही जहाज खतरे वाले क्षेत्र से बाहर आते हैं, उन्हें सुरक्षित रास्ते से अरब सागर तक एस्कॉर्ट किया जाता है. नौसेना जहाजों को रियल-टाइम दिशा-निर्देश भी दे रही है, जिससे वे सुरक्षित मार्ग पर चल सकें.

ईरान के निर्देश से बढ़ी चुनौती

ईरान ने जहाजों को सामान्य रास्ते से हटाकर अपने तट के पास चलने के निर्देश दिए हैं, जिससे जोखिम और बढ़ गया है. इसके अलावा, समुद्र में बारूदी सुरंगों की आशंका भी जताई जा रही है. ऐसे में हर जहाज के लिए अलग-अलग मार्गदर्शन देना जरूरी हो गया है. यही वजह है कि नौसेना की भूमिका इस समय बेहद अहम हो गई है.
ऐसे मेंं  भारत ने इस संकट को देखते हुए कूटनीतिक स्तर पर भी तेजी दिखाई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से बातचीत कर जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा सप्लाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया है. ईरान ने भारत समेत कुछ देशों के जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति भी दी है, जिससे स्थिति में थोड़ी राहत मिली है.

ऊर्जा सप्लाई पर भारत का फोकस

यह संकट ऐसे समय आया है, जब भारत की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं. इसलिए सरकार हर हाल में तेल और गैस की सप्लाई बनाए रखना चाहती है. खाली टैंकर भेजने की योजना इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सप्लाई लाई जा सके.
कुल मिलाकर, भारत इस संकट में सैन्य और कूटनीतिक दोनों स्तर पर सक्रिय नजर आ रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बाकी जहाज कितनी जल्दी सुरक्षित निकल पाते हैं और देश की ऊर्जा आपूर्ति कितनी सुचारू बनी रहती है.
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