India Rare Earth Magnets : भारत में अब दुनिया के सबसे ताकतवर मैग्नेट बनने की तैयारी शुरू हो गई है. भारी उद्योग मंत्रालय ने सिनट्रेड रेअर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया है. बता दें कि अब ये खास मैग्नेट भारत में ही बनाए जाएंगे और विदेशों से आयात पर निर्भरता कम होगी. जानकारी के मुताबिक, इस मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों से लेकर रक्षा क्षेत्र तक होता है. अभी तक भारत इन मैग्नेट को बड़े पैमाने पर बाहर से मंगाता रहा है, लेकिन बता दें कि अब सरकार इसे मेड इन इंडिया बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार ने इस योजना के लिए कुल 7 हजार 280 करोड़ का बजट तय किया है. बता दें कि इसमे कंपनियों को 750 करोड़ तक की पूंजी सहायता दी जाएगी और 6 हजार 450 करोड़ का सेल्स से जुड़ा प्रोत्साहन भी मिलेगा. इतना ही नही बल्कि IREL Ltd. के जरिए NdPr Oxide की सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी, जो कि इन मैग्नेट को बनाने का जरूरी कच्चा माल है. बताया जा रहा है कि इस योजना का लक्ष्य हर साल 6,000 मीट्रिक टन उत्पादन करना है. कम लागत पर काम करने वाली तीन कंपनियों को यह प्रोजेक्ट दिया जाएगा.
सामान्य मैग्नेट से कई गुना ज्यादा ताकतवर
रिपोर्ट के मुताबिक, रेअर अर्थ मैग्नेट असल में नियॉडीमियम, लोहा और बोरोन से मिलकर बनते हैं, इसी वजह से इन्हें NdFeB मैग्नेट कहा जाता है. जानकारी के मुताबिक, ये सामान्य मैग्नेट से कई गुना ज्यादा ताकतवर होते हैं और छोटे आकार में भी बहुत मजबूत मैग्नेटिक ताकत पैदा करते हैं. कहा जाता है कि एक बार तैयार होने के बाद ये बिना बिजली के लगातार काम करते रहते हैं. यही कारण है कि इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, विंड टर्बाइन, एयरोस्पेस, डिफेंस और हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है. इतना ही नही बल्कि मोबाइल के स्पीकर से लेकर फाइटर जेट के रडार तक, हर जगह इनका उपयोग होता है.
निर्भरता को कम करना चाहता है भारत
इसके साथ ही दुनिया में रेअर अर्थ मैग्नेट का सबसे बड़ा उत्पादन चीन करता है और करीब 90 प्रतिशत सप्लाई वहीं से आती है. बता दें कि अब भारत इस निर्भरता को कम करना चाहता है और पूरी सप्लाई चेन देश के अंदर ही विकसित करना चाहता है. इस मामले को लेकर टेंडर से जुड़ी तारीखों का कहना है कि दस्तावेज 20 मार्च 2026 से उपलब्ध हैं. इसके साथ ही प्री-बिड मीटिंग 7 अप्रैल को होगी. पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और दो चरणों में पूरी की जाएगी.
भारत को टेक्नोलॉजी के लिए बेहद अहम
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मैग्नेट से संबंधित योजना को 26 नवंबर 2025 को नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी थी. ऐसे में सरकार का लक्ष्य है कि कच्चे माल से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी प्रक्रिया भारत में ही हो, ताकि देश आत्मनिर्भर बन सके. फिल्हाल उनका मानना है कि यह कदम भारत को टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री के क्षेत्र में मजबूत बनाने के साथ-साथ भविष्य की ऊर्जा और रक्षा जरूरतों के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है.
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