Tehran: अमेरिका के साथ जारी तनाव और युद्ध के बीच ईरान में तख्तापलट की भी आंशंका तेज हो गई है. देश में सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आने लगा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ कट्टरपंथी नेताओं ने खुलेआम तख्तापलट की आशंका जताई है. पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद देश के भीतर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है. कट्टरपंथी गुट राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर अमेरिका के साथ समझौता कर ईरान की क्रांतिकारी नीतियों से समझौता करने का आरोप लगा रहे हैं.
ईरान में राजनीतिक तख्तापलट की तैयारी
जिससे कट्टरपंथी धड़े में असंतोष बढ़ गया है. कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान में राजनीतिक तख्तापलट की तैयारी चल रही है. उन्होंने लिखा कि देश की जनता को सतर्क रहने की जरूरत है. वहीं सांसद कमरान गजनफरी ने आरोप लगाया कि सरकार संसद और सर्वोच्च नेता की भूमिका कमजोर कर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को ज्यादा शक्तियां देना चाहती है. उनके मुताबिक यह धीरे-धीरे सत्ता का केंद्रीकरण करने की कोशिश है.
सार्वजनिक मंच से राष्ट्रपति पेजेशकियन को धमकी
तनाव उस समय और बढ़ गया जब सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने सार्वजनिक मंच से राष्ट्रपति पेजेशकियन को धमकी देते हुए कहा, “अगर सर्वोच्च नेता की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारे हाथ में ब्लेड होगा और आपका गला. हम आपके लिए जहन्नुम बना देंगे.” इस बयान की देशभर में आलोचना हुई, लेकिन अब तक उनके खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है.
अमेरिका और इजरायल के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की मांग
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव फिर बढ़ गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी कार्रवाई और अमेरिकी जवाबी हमलों के बाद कट्टरपंथी नेताओं ने सरकार से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ और सख्त सैन्य कार्रवाई की मांग शुरू कर दी है. पूर्व विदेश मंत्री मनूचेहर मोत्ताकी ने यहां तक कहा कि ईरान को क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों को पकड़कर अपने देश लाना चाहिए.
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