Tehran: अमेरिका से चल रहे डील के बीच ईरान में रूस से भेजी गई ईंधन की पहली खेप पहुंच गई है. रूस से आई 5,000 टन ईंधन की पहली खेप को ईरान में कैस्पियन पोर्ट पर प्राप्त किया गया है, जिसे रेल मार्ग के जरिए अफगानिस्तान भेजा जाएगा. अंजली फ्री जोन संगठन के प्रमुख मोस्तफा ताती-मोघद्दम ने कहा कि इस परियोजना से ईरान की ट्रांजिट क्षमता बढ़ेगी और देश की क्षेत्रीय लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भूमिका मजबूत होगी.
सीधे रेल तक माल पहुंचाने की व्यवस्था शुरू
उनके मुताबिक जल्द ही पोर्ट पर जहाज से सीधे रेल तक माल पहुंचाने की व्यवस्था शुरू होगी, जिससे ईंधन परिवहन की लागत घटेगी और मध्य एशिया तथा यूरेशियाई देशों के साथ व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा. बता दें कि रूस ने ईरान को खुफिया सहायता भी प्रदान की, जिसमें अमेरिकी सैन्य ठिकानों से संबंधित आंकड़े भी शामिल थे. विश्लेषकों ने इन योगदानों को इस रूप में वर्णित किया कि इनसे ईरान क्रेमलिन के साथ व्यापक टकराव में उलझे बिना अपनी रक्षा व्यवस्था को बनाए रखने में सक्षम हुआ.
एक और दौर की बातचीत शुरू
उधर, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर एक और दौर की बातचीत शुरू हो गई है. पिछले कई दिनों से कहा जा रहा था कि उस पर बस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का साइन होना बाकी है. अब उसमें अमेरिका ने एक नया पेच फंसा दिया है. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई हाई-लेवल बैठक के दौरान अपने ही अधिकारियों की ओर से तैयार ड्राफ्ट में बदलाव की मांग कर दी है.
जल्द अंतिम रूप भी देना चाहते हैं ट्रंप
इसके बाद दोनों देशों के बीच एक और दौर की बातचीत शुरू हो गई है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ट्रंप डील चाहते हैं और उसे जल्द अंतिम रूप भी देना चाहते हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि कुछ अहम बिंदुओं को और मजबूत बनाया जाए. सबसे बड़ा विवाद ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम स्टॉकपाइल और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है. शुक्रवार को ट्रंप ने खुद कहा था कि वह सिचुएशन रूम में बैठक कर डील पर अंतिम फैसला लेने जा रहे हैं.
समझौते के कुछ हिस्सों पर आपत्ति
इससे पहले अमेरिकी अधिकारियों का दावा था कि ईरान समझौते के लिए तैयार है और अब सिर्फ ट्रंप की मंजूरी बाकी है. लेकिन बैठक में ट्रंप ने ड्राफ्ट समझौते के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जता दी. रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा ड्राफ्ट में ईरान ने सिर्फ इतना वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. इसके अलावा 60 दिन की एक समयसीमा तय की गई है, जिसके दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों पर विस्तृत बातचीत होनी है.
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