पुर्तगाल में भारतीय महिला को समझ आई देश की वेल्यू, बोली-‘मेरे भारत का कोई मुकाबला नहीं..!’

Lisbon: पुर्तगाल में रहने वाली भारतीय महिला श्रुति शिवम ने अपना अनुभव साझा किया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उन्होंने भारत की सात ऐसी सुविधाओं का जिक्र किया, जिनकी कमी उन्हें विदेश में महसूस होती है. श्रुति के अनुसार भारत में किराने का सामान, खाना, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें कुछ ही मिनटों या घंटों में घर पहुंच जाती हैं. कई ऐप्स की मदद से लोग घर बैठे लगभग सब कुछ मंगा सकते हैं.

बिना योजना के तुरंत काम करवाना आसान नहीं

वहीं पुर्तगाल में कई जगहों पर लोगों को सामान लेने के लिए खुद दुकान या पिकअप सेंटर जाना पड़ता है. भारत में अक्सर अचानक जरूरत पड़ने पर डॉक्टर, इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर या अन्य सेवाएं जल्दी मिल जाती हैं. लेकिन, यूरोप के कई देशों की तरह पुर्तगाल में भी अधिकांश काम पहले से तय अपॉइंटमेंट के आधार पर होते हैं. बिना योजना के तुरंत काम करवाना आसान नहीं होता. भारत में 10 मिनट, 30 मिनट और उसी दिन डिलीवरी जैसी सेवाएं आम हो चुकी हैं.

भारत की तेज डिलीवरी व्यवस्था की याद

श्रुति का कहना है कि पुर्तगाल में अगले दिन डिलीवरी मिलना भी काफी तेज सेवा मानी जाती है. यही कारण है कि उन्हें भारत की तेज डिलीवरी व्यवस्था की याद आती है. उन्होंने बताया कि भारत में डॉक्टर से मिलना, जांच करवाना और दवाइयां प्राप्त करना अपेक्षाकृत आसान होता है. हालांकि पुर्तगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था अच्छी मानी जाती है, लेकिन कई मामलों में डॉक्टर से मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. भारत में ऑटो, टैक्सी, बस, ट्रेन और मेट्रो जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं. लोग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से यात्रा कर सकते हैं.

पुर्तगाल में परिवहन सुविधाएं अच्छी लेकिन खर्च ज्यादा

श्रुति का कहना है कि पुर्तगाल में परिवहन सुविधाएं अच्छी हैं, लेकिन उनका खर्च भारत की तुलना में ज्यादा महसूस होता है. भारत में घर की किसी भी तकनीकी समस्या के लिए प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन या रिपेयर तकनीशियन जल्दी मिल जाते हैं. कई बार वे उसी दिन घर आकर काम भी कर देते हैं. जबकि विदेशों में इन सेवाओं के लिए पहले से समय लेना पड़ता है और शुल्क भी अधिक होता है. श्रुति ने कहा कि भारत में खराब हुई वस्तुओं को फेंकने के बजाय उन्हें ठीक कराने की परंपरा मजबूत है.

नया सामान खरीदना पसंद

मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घरेलू उपकरण आसानी से रिपेयर हो जाते हैं. इसके विपरीत कई यूरोपीय देशों में लोग खराब वस्तुओं की मरम्मत कराने के बजाय नया सामान खरीदना पसंद करते हैं. वीडियो वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी. विदेश में रहने वाले कई भारतीयों ने श्रुति की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि विदेश जाने के बाद उन्हें भी भारत की कई सुविधाओं की अहमियत समझ में आई.

यूरोप में सेवाएं महंगी

वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यूरोप में सेवाएं महंगी होने का एक बड़ा कारण वहां श्रमिकों को मिलने वाला बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और श्रम अधिकार हैं. इसलिए वहां रोजमर्रा की सेवाएं अपेक्षाकृत महंगी और धीमी हो सकती हैं.

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