Russian attack on Chernoby : यूक्रेन के चेरनोबिल परमाणु केंद्र पर रूसी हमले के बाद रेडिएशन का गंभीर खतरा पैदा हो गया है. जानकारी के मुताबिक, ग्रीनपीस संगठन ने सख्त चेतावनी जारी की है. बता दें कि आज से 40 साल पहले इसी परमाणु केंद्र पर दुनिया की सबसे भयानक परमाणु आपदा हुई थी. ऐसे में अब इसकी 40वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर ग्रीनपीस ने गंभीर चेतावनी जारी की है. इस मामले को लेकर ग्रीनपीस का कहना है कि चेरनोबिल परमाणु ऊर्जा संयंत्र में बनी आंतरिक विकिरण सेल के ‘अनियंत्रित ढहने’ का खतरा बढ़ गया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसी कोई दुर्घटना होने पर अत्यधिक रेडियोएक्टिव धूल पर्यावरण में फैल सकती है, जिससे दशकों से चल रहे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रयास व्यर्थ हो सकते हैं. बता दें कि 14 अप्रैल को जारी अपनी विस्तृत रिपोर्ट में ग्रीनपीस ने कहा कि 1986 के विस्फोट के तुरंत बाद जल्दबाजी में बनाए गए स्टील और कंक्रीट के ‘सरकोफैगस’ के स्ट्रक्चर की मजबूती तेजी से खराब हो रही है. ऐसे में इस आंतरिक सेल को कई साल पहले हटाना था, लेकिन यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कारण यह प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए रुक गई है.
मरम्मत के बावजूद न्यू सेफ कन्फाइनमेंट की नहीं सुरक्षा
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चेरनोबिल संयंत्र के अवशेषों को दो परतों से ढका गया है. ऐसे में पहली पुरानी आंतरिक स्टील-कंक्रीट शेल वहीं दूसरी आधुनिक उच्च तकनीक वाली बाहरी सेल जिसे न्यू सेफ कन्फाइनमेंट (NSC) कहा जाता है. ऐसे में इस मामले को लेकर कीव ने आरोप लगाते हुए कहा कि 2022 में पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू करने के बाद से रूस ने बार-बार इस स्थल को निशाना बनाया है. पिछले साल एक हमले में बाहरी सेल को भी छेद दिया गया था. रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए कहा कि मरम्मत के बावजूद न्यू सेफ कन्फाइनमेंट की सुरक्षा क्षमता पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है.
रेडियोएक्टिव रिसाव से जा सकती हैं सैकड़ों जान
बता दें कि ग्रीनपीस यूक्रेन के सीनियर न्यूक्लियर विशेषज्ञ शॉन बर्नी ने कहा कि “अगर आंतरिक सरकोफैगस ढह गया तो पर्यावरण में रेडियोएक्टिविटी का रिसाव होगा, जो कि विनाशकारी होगा. बता दें कि इससे सैकड़ों लोगों की जान को खतरा हो सकता है और मौत भी हो सकती है. इस मामले को लेकर ग्रीनपीस का कहना है कि आंतरिक सेल के अस्थिर हिस्सों को हटाना जरूरी है, वरना उनका अनियंत्रित पतन हो सकता है. लेकिन युद्ध के कारण साइट पर कोई काम लगभग असंभव हो गया है. ऐसे में बर्नी ने कहा कि रूस अब भी चेरनोबिल के ऊपर मिसाइलें दाग रहा है.
यूरोप के खिलाफ प्रभावी रूप से परमाणु युद्ध
जानकारी के मुताबिक, आपदा के 40 साल बाद भी रूस यूक्रेन और यूरोप के लोगों के खिलाफ प्रभावी रूप से परमाणु युद्ध कर रहा है. संयंत्र के निदेशक सेर्गेई ताराकानोव का मानना है कि स्थल के आसपास की स्थिति बहुत खतरनाक है. ऐसे में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “अगर कोई रॉकेट सीधे सेफ कन्फाइनमेंट पर नहीं भी गिरा, बल्कि 200 मीटर दूर भी गिरा, तो यह भूकंप जैसा प्रभाव पैदा कर सकता है, जिससे आंतरिक से के ढहने का खतरा बढ़ जाएगा.” हालात को देखते हुए पिछले महीने फ्रांस ने कहा था कि 2025 में रूसी हमले के बाद चेरनोबिल की सुरक्षा गुंबद की मरम्मत के लिए लगभग 500 मिलियन यूरो (करीब 4500 करोड़ रुपये) की जरूरत है.
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