‘हाथी और ड्रैगन को आना होगा साथ’, PM मोदी के साथ बैठक में शी जिनपिंग का बड़ा बयान

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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SCO Summit: तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की. इस दौरान राष्ट्रपति शी ने इस बैठक को दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक महत्वपूर्ण कदम बताया. साथ ही उन्होने ये भी कहा कि चीन और भारत के लिए “दोस्त और अच्छे पड़ोसी” के रूप में मिलकर काम करना जरूरी है. इसके अलावा उन्होंने दोनों देशों से अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से संभालने का आह्वान भी किया.

चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि ड्रैगन और हाथी का एक साथ आना बेहद जरूरी है. चीन और भारत दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं और दुनिया के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देश हैं. हमें बहुपक्षवाद को बनाए रखने, बहुध्रुवीय विश्व का समर्थन करने और एशिया और उसके बाहर शांति और समृद्धि के लिए काम करने की अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों को पूरा करना होगा।”

सीमा पर तनाव के बाद द्विपक्षीय संबंधों में नई शुरुआत

वही भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वी लद्दाख में सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद हुई प्रगति की सराहना की और कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर एक “शांतिपूर्ण माहौल” बना है. उन्होने कहा कि “देपसांग और डेमचोक में सैनिकों की वापसी के बाद, हमने शांति और स्थिरता का एक नया माहौल देखा है. यह हमारे संबंधों को एक सकारात्मक दिशा देता है. पिछले साल कजान में राष्ट्रपति शी के साथ हुई बातचीत ने एक रचनात्मक रुख स्थापित किया था और वर्तमान बातचीत इस गति को और मजबूत करती है.

कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू

पीएम मोदी ने घोषणा की कि भारत और चीन अपने विशेष प्रतिनिधियों के माध्यम से सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रबंधन पर एक समझौते पर पहुंच गए हैं. दोनों पक्ष प्रमुख तीर्थयात्रा मार्ग, कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ान सेवाएं शुरू करने पर भी सहमत हुए.दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित हमारे सहयोग से गहराई से जुड़े हैं. हम आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

मोदी-शी शिखर सम्मेलन ने दिया रणनीतिक संदेश

बता दें कि दोनों नेताओं के बीच बढ़ती वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच यह बैठक हो रही है, खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रमुख आयातों पर 50% टैरिफ लगाने के फैसले के बाद, जिसमें भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर विशेष रूप से टारगेट किए गए 25% शुल्क भी शामिल हैं. भू-राजनीतिक माहौल ने एससीओ के प्रमुख खिलाड़ियों भारत, चीन और रूस के बीच घनिष्ठ सहयोग को प्रोत्साहित किया है.

मोदी-शी बैठक की मुख्य बातें

विशेष प्रतिनिधियों के माध्यम से सीमा प्रबंधन पर समझौता.
कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली.
भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानों की बहाली.
बहुपक्षवाद और बहुध्रुवीय विश्व के प्रति साझा प्रतिबद्धता.
दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टिकोण से संबंधों को संभालने की पारस्परिक प्रतिज्ञा.
सीमा पर शांति और स्थिरता पर जोर.

इसे भी पढेंः-भारत-चीन व्यापार समझौते पर नेपाल को ऐतराज, PM ओली ने शी जिनपिंग को दर्ज कराई आपत्ति

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