पहले दिखाई सख्ती, फिर कर ली दोस्ती…अमेरिका और रूस के बीच तनातनी का अंत!

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Trump Putin: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी नीतियों को लेकर विवादों के केंद्र में हैं. दरअसल, अमेरिका कांग्रेस ने जिस रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों का कानून पारित किया, भारत-चीन जैसे देशों को रूसी तेल खरीदने पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ की चेतावनी दी, अब उसी रूस से ट्रंप ने डीजल डील कर ली है. ट्रंप के इस फैसलें को देखकर ऐसा लगता है मानो वे अपने फायदे के लिए किसी भी नियम को ताक पर रख देंगे, जिसका ताजा उदाहरण अमेरिका रूस डील है.

रूस पर सख्ती, फिर खुद खरीदा रूसी डीजल

दरअसल, हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस से अमेरिका की लाखों बैरल तेल की डील हो गई है. ऐसे में रूस अब अमेरिका को अब बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराएगा, जिससे ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. अमेरिका का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में पारित रूस प्रतिबंध कानून के तहत रूसी ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का रास्ता खोला गया था. यही कारण है कि डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने ट्रंप पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया.

 रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि जब भारत, चीन या अन्य देशों को रूसी तेल खरीदने पर चेतावनी दी जा रही थी, तब राष्ट्रपति का स्वयं रूस के साथ ऊर्जा समझौता करना अमेरिकी नीति को कमजोर करता है. उन्होंने इसे “शर्मनाक” करार देते हुए समझौता रद्द करने की मांग की.

ईरान युद्ध और बदलती रणनीति

बता दें कि फरवरी 2026 में ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की. इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरत बताया, लेकिन फिर जून में  ईरान के साथ युद्धविराम समझौता (MOU) भी किया गया. इस समझौते में प्रतिबंधों में राहत और पुनर्निर्माण सहायता जैसी बातें शामिल थीं, लेकिन जुलाई आते-आते ट्रंप ने खुद उस समझौते को समाप्त घोषित कर दिया और फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी. यह घटनाक्रम दर्शाता है कि दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति की बजाय तात्कालिक राजनीतिक संदेश अधिक महत्वपूर्ण बन गया.

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