पहले Asim Munir को आर्मी परेड डे पर निमंत्रण, फिर कश्मीर पर बात… अचानक पाकिस्तान का सगा क्यों हो गया अमेरिका?

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

US-Pakistan ties: ऑपरेशन सिंदूर की शुरूआत के बाद से ही पाकिस्‍तान को लेकर अमेरिकी प्रशासन के रुख कुछ बदले बदले नजर आ रहे है. और हाल ही में य‍ह स्‍पष्‍ट भी हो गया है कि सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिका जिस तरह से पहले भारत के पक्ष में बात करता था अब वैसा नहीं है. दरअसल पिछले महज कुछ घटों में ही अमेरिकी राष्‍ट्रपति ने कई ऐसे संकेत दिए है, जिसपर भारत को गौर करने की आवश्‍यकता है.

पहला:- अमेरिकी सेना के केंद्रीय कमांड (यूएससेंटकाम) प्रमुख माइकल कुरिला का पाकिस्तान को जबरदस्‍त साझेदार बताना.

दूसरा:- 14 जून को अमेरिकी सैन्य दिवस के पैरेड में पाकिस्तान सेना के प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को बतौर मेहमान आमंत्रित करना.

तीसरा:- कश्‍मीर मामले में भारत-पाकिस्‍तान के बीच ट्रंप का हस्तक्षेप.

पाकिस्‍तान के साथ रिश्‍ते बनाकर रखने की जरूरत

दरअसल, अमेरिकी सेंटकॉम के प्रमुख जनरल माइकल कुरिला ने कहा है कि हमें भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ रिश्ते बना कर रखने की जरूरत है. हम ऐसा विचार नहीं रख सकते कि अगर भारत के साथ संबंध रखना है तो हम पाकिस्तान के साथ नहीं रख सकते.पाकिस्तान के साथ हमारा काफी जबरदस्त साझेदारी रही है. पाकिस्तान ने आईएसआईएस-खोरासान के आतंकियों के खिलाफी काफी कार्रवाई की है, दर्जनों आतंकवादियों को मारा है. अमेरिका के साथ सूचनाएं साझा की है और बड़े आतंकियों को पकड़ने में मदद की है.

ट्रंप ने पाकिस्‍तान का किया धन्‍यवाद

इसी बीच उन्‍होंने अगस्त, 2021 में 13 अमेरिकी सैनिकों की हत्या करने वाले आतंकवादी मोहम्मद सरीफुल्लाह को अमेरिका प्रत्यर्पित किये जाने के मामले का भी जिक्र किया. इसके लिए राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही पाकिस्तान को कई बार धन्यवाद कह चुके हैं.

पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख मुनीर का अमेरिका दौरा

वहीं, पाकिस्‍तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल मुनीर को अमेरिकी सैन्य समारोह में आमंत्रित करना कई सवाल खड़े कर रहा है. दरअसल, तीन दशक पहले जब पाकिस्तान और अमेरिकी सेना के बीच काफी गहरा संबंध था तब पाक सेना प्रमुख का अमेरिकी दौरा एक सामान्य बात थी लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी सरकार पाक सेना से दूरी बना कर रखने लगी थी.

ऐसे में मुनीर के इस दौरे पर आश्चर्य जताया जा रहा है. वहीं, इसके पीछे चीन के साथ अमेरिकी रिश्तों के समीकरण को भी अहम माना जा रहा है. कभी अमेरिका का करीबी साझेदार रहा पाकिस्तान आज चीन के करीब है. वहीं, अमेरिका और चीन के रिश्ते काफी तल्खी भरा है ऐसे में हो सकता है कि अमेरिका रणनीतिक हितों को देखते हुए पाकिस्तान पर डोरे डाल रहा है.

कश्‍मीर मुद्दे पर ट्रंप का रूख

इसके अलावा, व्हाईट हाउस की प्रवक्ता टैमी ब्रुस से मंगलवार को पूछा गया कि क्‍या राष्ट्रपति ट्रंप कश्मीर मुद्दे में हस्तक्षेप करेंगे तो उनका जवाब था कि, ‘उनकी योजना पर मैं कुछ नहीं कह सकती, लेकिन पूरी दुनिया ट्रंप की आदत जानती है. वह दुनिया में एकमात्र ऐसे हैं जो दो ऐसे लोगों में वार्ता करा सकते हैं जिसे असंभव माना जाता है. ऐसे में यदि वो ऐसा करते हैं तो किसी को अचंभित नहीं होना चाहिए.’

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