रामायण पढ़ने सुनने से निर्मल होता है मन: दिव्य मोरारी बापू

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, हमें निज धर्म पर चलना बताती रोज रामायण। सदा सदा शुभ आचरण करना सिखाती रोज रामायण।। किसी भी कार्य की सफलता के लिए तीन बातें आवश्यक हैं शुभ संकल्प, क्रिया और भगवान की कृपा।
संकल्प शुभ होना चाहिए सब सुखी हों, सबके कल्याण की भावना से किया गया संकल्प शुभ माना जाता है और पूर्ण होता है। कई लोग संकल्प तो करते हैं लेकिन उसको क्रियान्वित नहीं करते, केवल संकल्प से बात नहीं बनेगी दूसरा कार्य है क्रिया। उस संकल्प को पूर्ण करने के लिए क्रिया करना होता है अर्थात् प्रयास करना होता है।
तीसरा जो बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है वह है भगवान की कृपा, भगवान की कृपा के बिना कुछ भी नहीं होता। कार्य की सफलता के लिए भगवान का सुमिरण भी आवश्यक है। मन क्रम वचन छाणि चतुराई। भजत कृपा करिहैं रघुराई ।।प्रभु श्रीसीतारामजी के मंगलमय चरित्र से समन्वित शास्त्र का नाम रामायण है।
रामायण भगवान का निवास स्थान है जहां भगवान श्रीराम सपरिकर निवास करते हैं। रामायण प्रभु के चरणों तक पहुंचने का मार्ग है, जिस मार्ग से प्रभु चरणों की प्राप्ति होती है। रामायण कल्पवृक्ष है श्री रामायण सुनने पढ़ने से भक्त की समस्त मनोकामना पूर्ण होती है।
रामायण भगवान श्री राम का वाङ्गमय स्वरूप है वांगमय स्वरूप का अर्थ है भगवान की शब्दमयी मूर्ति। रामायण में और प्रभु श्री राम में रंच मात्र अन्तर नहीं है। रामायण को प्रणाम करने से प्रभु श्री राम को प्रणाम करने का पुण्य फल मिलता है। रामायण सुनने पढ़ने से प्रभु को सुनने पढ़ने का फल प्राप्त होता है।
रामायण आध्यात्मिक दर्पण है। जब हम रामायण सुनते या पढ़ते हैं तो उसमें हमें अपना जीवन दिखाई पड़ता है। हमारा जीवन कैसा है? इसमें क्या-क्या सुधार की आवश्यकता है, अगर नहीं सुधार किया तो इसका परिणाम क्या होगा। सब कुछ रामायण पढ़ने सुनने से पता लग जाता है।
जीवन की हर समस्या का समाधान रामायण में है। हमारे आपके जीवन का कोई ऐसा प्रश्न नहीं है, जिसका उत्तर रामायण में न हो। रामायण पढ़ने सुनने से उत्तर स्वयः प्राप्त हो जाता है, हर समस्या का समाधान मिलता है। व्यक्तिगत, पारिवारिक अथवा सामाजिक समस्या हो हर समस्या का समाधान रामायण में है।
रामायण पढ़ने सुनने से मन निर्मल होता है,वाणी पवित्र होती है, कर्म उज्जवल होता है और जीवन महान बनता है। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।
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