वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की अर्थव्यवस्था से एक राहत भरी खबर सामने आई है. मार्च महीने में देश का व्यापारिक घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया है. यह कमी ऐसे समय में आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता चरम पर है. निर्यात में बढ़ोतरी और आयात में गिरावट ने भारत के व्यापार संतुलन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह रुझान आगे भी जारी रहा तो देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिल सकता है.
निर्यात में बढ़ोतरी, 38.92 अरब डॉलर तक पहुंचा आंकड़ा
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2026 में भारत का निर्यात फरवरी के 36.61 अरब डॉलर से बढ़कर 38.92 अरब डॉलर हो गया. यह 6.3 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है. यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय उत्पादों की मांग बनी हुई है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल (Rajesh Agrawal) ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से अधिक हो गया है. यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 825.26 अरब डॉलर के मुकाबले 4.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है.
आयात में गिरावट से मिला बड़ा सहारा
मार्च के दौरान भारत का आयात 5.98 प्रतिशत घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया. आयात में आई इस कमी ने व्यापारिक घाटे को कम करने में अहम भूमिका निभाई है. साथ ही इससे देश के राजकोषीय संतुलन पर भी सकारात्मक असर पड़ा है. यह गिरावट मुख्य रूप से कच्चे तेल के आयात में कमी के कारण देखने को मिली.
कच्चे तेल की रणनीति ने किया कमाल
सूत्रों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं. ऐसे में भारतीय तेल कंपनियों ने नई खरीद बढ़ाने के बजाय अपने रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल किया और पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन जारी रखा. इस रणनीति से तेल आयात बिल में कमी आई, जिसने व्यापार घाटा कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
वैश्विक तनाव का असर
यह आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर दिया है. अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी है और किसी भी जहाज को आने-जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने यह भी संकेत दिया है कि तेहरान के साथ बातचीत फिर से शुरू हो सकती है, जिससे स्थिति में सुधार की उम्मीद बनी हुई है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद किए जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है. यह मार्ग दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसके प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है.
भारत के लिए राहत भरी खबर
इन सबके बीच भारत के लिए राहत की बात यह रही कि ईरान ने कुछ भारतीय एलपीजी जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी. भारतीय ध्वज वाला एलपीजी पोत ‘जग विक्रम’ लगभग 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सुरक्षित रूप से कांडला बंदरगाह पहुंचा. इससे देश में रसोई गैस की सप्लाई को मजबूती मिली. इसके अलावा ‘ग्रीन आशा’ नामक एक अन्य भारतीय जहाज भी 15,400 टन एलपीजी लेकर सुरक्षित रूप से जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह पहुंचा. इन जहाजों का सुरक्षित पहुंचना ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है जब वैश्विक सप्लाई चेन पर संकट बना हुआ है.
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